Haddaan ohde lyi paar karo
Jehra tuhade layi be hadd howe
ਹੱਦਾਂ ਓਹਦੇ ਲਈ ਪਾਰ ਕਰੋ
ਜਿਹੜਾ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਬੇ-ਹੱਦ ਹੋਵੇ – ਹੰਕਾਰੀ
Haddaan ohde lyi paar karo
Jehra tuhade layi be hadd howe
ਹੱਦਾਂ ਓਹਦੇ ਲਈ ਪਾਰ ਕਰੋ
ਜਿਹੜਾ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਬੇ-ਹੱਦ ਹੋਵੇ – ਹੰਕਾਰੀ
कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,
फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,
एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी
हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी