Kehte hai yu udaas firte ho
sardiyeo ki shaamo me
is tarah hi hota hai
is tarah ke kaamo me
कहते हैं यूं उदास फिरते हो
सर्दियों की शामों में
इस तरह ही होता है
इस तरह के कामों में…………
Kehte hai yu udaas firte ho
sardiyeo ki shaamo me
is tarah hi hota hai
is tarah ke kaamo me
कहते हैं यूं उदास फिरते हो
सर्दियों की शामों में
इस तरह ही होता है
इस तरह के कामों में…………
The desert knows me well, the night and the mounted men, the battle and the sword, the paper and the pen.
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।