HAMAIN KHUD KO SIRF TERE DAAYRE TAK HI TO MEHDOOD RAKHNA HAI
MOHABBAT SE ISHQUE KA YEH SAFAR OOROOJ SE ZAWAAL KI JAANIB TO AAYE GA NAHI
ہمیں خود کو صرف تیرے دائرے تک ہی تو محدود رکھنا ہے
محبّت سے عشق کا یہ سفر عروج سے زوال کی جانب تو آئے گا نہیں
HAMAIN KHUD KO SIRF TERE DAAYRE TAK HI TO MEHDOOD RAKHNA HAI
MOHABBAT SE ISHQUE KA YEH SAFAR OOROOJ SE ZAWAAL KI JAANIB TO AAYE GA NAHI
ہمیں خود کو صرف تیرے دائرے تک ہی تو محدود رکھنا ہے
محبّت سے عشق کا یہ سفر عروج سے زوال کی جانب تو آئے گا نہیں
Apna jihnu kehnde si, oh gair hogya…
Pyar bathera kita si, par vair hogya…
ishqda paani peeta si, oh vi zehar hogya…
apna jihnu kehnde si, oh gair hogya..
उसके चेहरे में कई राज छुपे हैं, घबराती है बताने से..
कभी बेखौफ करे इजहार कभी, डरे जज्बात जताने से..
कभी आँखों से हटने नहीं देती, कभी फ़र्क नी पड़ता जाने से..
कभी मारने पर हंस पडती है, कभी रोये हाथ लगाने से..
कभी-कभी वो बाज नहीं आती, बेमतलब प्यार लुटाने से..
कभी लगे ना जाने कैसा प्यार है, भर देती दिल वो ताने से..
कभी-कभी वो घबरा जाती है, मुझे अपने पास बुलाने से..
कभी-कभी नहीं थकती वो अपनी, पलकों पे मुझे झूलाने से..
कभी दूर मुझसे है हो जाती, अचानक किसी के आने से..
कभी लड़ पड़ती मेरा हाथ पकड़ कर, मेरे लिए वो भरे जमाने से..
कभी परेशान हो जाता उसके, बेमतलब के शर्माने से..
कभी मुश्किल में फंस जाता हूं, परदा भी उसे कराने से..
अब तो मुझे भी डर है उसके, अचानक ही मुस्कुराने से..
क्या सबकी जिंदगी में है कोई ऐसा, या मेरी ही अलग है जमाने से..