DE KAR WAQT KAR KE BAATAIN IS TARHA WO UTHAATE HAIN NAKHRE OROON KE
HUM TO BAS HAIN KAR KE MOHABBAT YUNHI KHASAARA KIYE HUE
دے کر وقت کر کے باتیں اس طرح وہ اٹھاتے ہیں نخرے اوروں کے
ہم تو بس ہے کر کے محبّت یوں ہی خسارہ کئے ہوئے
DE KAR WAQT KAR KE BAATAIN IS TARHA WO UTHAATE HAIN NAKHRE OROON KE
HUM TO BAS HAIN KAR KE MOHABBAT YUNHI KHASAARA KIYE HUE
دے کر وقت کر کے باتیں اس طرح وہ اٹھاتے ہیں نخرے اوروں کے
ہم تو بس ہے کر کے محبّت یوں ہی خسارہ کئے ہوئے
आग को बुझा देता है क्रोध ।
आग जलते है हवा में, लेकिन चिंगारी में जलता है क्रोध।
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अपना कविता किसी को मत पढ़ाओ।
अगर कोई पढ़ना चाहते है, उसे सच ढूंढ़ने के लिए बताओ।
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जबाब हर बात पे मत दो।
सिर्फ वक्त का इंतज़ार करो।
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जब बन रहे हों, सुनना पड़ता हैं।
जब बन गये हों, लोग सुनने आते हैं।
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रिश्ते आसमान की रूप।
आज बारिश, कल धूप।
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बात लहर की तरह।
जनम देती रिश्ते, टूटती भी रिश्ते, सोचो ज़रा।
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मैदान में जितना राजनीती होता है, उससे भी ज्यादा होता है घर पर।
घर का बाप ही बनता है नेता, नेता पैदा भी होता हे घर पर।
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जो तुम्हे पाता है, वो किसी को मत बताओ।
समय में प्रयोग करो, नहीं तो लोग समझेंगे के तुम मुर्ख हो।
If he would love me like the ocean loved it’s wave,
I would forever be those highest waves.
But, he choose to stay at shore.