YEH JO TALKH ZABAANI AAP KI SUNTE AAYE HAIN AAJ TAK HUM
BAA KHUDA ISE EHTERAAMAN HUM NE APNE ZARF MAIN DHAALA HUA HAI
یہ جو تلخ زبانی آپ کی سنتے آئے ہیں آج تک ہم
با خدا اسے احتراماََ ہم نے اپنے ظرف میں ڈھالا ہوا ہے
YEH JO TALKH ZABAANI AAP KI SUNTE AAYE HAIN AAJ TAK HUM
BAA KHUDA ISE EHTERAAMAN HUM NE APNE ZARF MAIN DHAALA HUA HAI
یہ جو تلخ زبانی آپ کی سنتے آئے ہیں آج تک ہم
با خدا اسے احتراماََ ہم نے اپنے ظرف میں ڈھالا ہوا ہے
chete e pal saare jo tere naal bataaye ne
mitt gaye yaada cho jo saah tere baajo aaye ne
likh waqt de paneyaa te nit taali jaana aa
tainu cheta aau mera jad koi shooh ke dil di langhugaa
ਚੇਤੇ ਏ ਪਲ ਸਾਰੇ ਜੋ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਬਤਾਏ ਨੇ
ਮਿਟ ਗੲੇ ਯਾਦਾਂ ਚੋਂ ਜੋ ਸਾਹ ਤੇਰੇ ਬਾਝੋਂ ਆਏ ਨੇ
ਲਿੱਖ ਵਖ਼ਤ ਦੇ ਪੰਨਿਆਂ ਤੇ ਨਿੱਤ ਟਾਲੀ ਜਾਨਾਂ ਆ
ਤੈਨੂੰ ਚੇਤਾ ਆਉ ਮੇਰਾ ਜਦ ਕੋਈ ਛੂਹ ਕੇ ਦਿਲ ਦੀ ਲੰਘੂਗਾ
कॉलेज तक हम पर ना पढ़ाई की जिम्मेदारी रहती है , और उसके बाद घर की जिम्मेदारी आ जाती है । अपने सपनो को रख कर एक तरफ , अपनो के सपनो को पूरा करने की जिम्मेदारी आती है । क्या करे कोई अगर लाखो की भीड़ में एक शख्स अच्छा लगे , तो उसे भी ठुकराना पड़ता है । प्यार व्यार सब अच्छा नही यही बताकर दिल को अपने मनाना पड़ता है , कभी पढ़ाई की तो कभी घर की जिम्मेदारी से दिल उदास भी हो तो सामने रह कर सबके चेहरे से तो मुस्कुराना पड़ता है । हर किसी को परेशानी अपनी खुद ही पता होती है , वरना दूसरो को खुश चेहरा ही दिखता है । खुद के अलावा किसी को क्या पता की कोन रोज यहां कितनी मुश्किलों में उलझता सा है , छोटा मोटा काम करके घर का खर्चा निकालना होता है । कभी कभी नौबत ऐसी आती है की दस या पंद्रह हजार में , महीना सारा संभालना पड़ता है । यहां से वहा से ले लेकर बच्चो की ख्वाईशे भी पूरी करनी पड़ती है , कोई साथ नही देता यार यहां जिंदगी की ये लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ती है ।