kaise karoon mukadama us par usakee bewafai ka,
kamabakht ye dil bhee usee ka vakeel nikala…
कैसे करूं मुकदमा उस पर उसकी बेवफाई का,
कमबख्त ये दिल भी उसी का वकील निकला…
kaise karoon mukadama us par usakee bewafai ka,
kamabakht ye dil bhee usee ka vakeel nikala…
कैसे करूं मुकदमा उस पर उसकी बेवफाई का,
कमबख्त ये दिल भी उसी का वकील निकला…
“तन्हाई में भी बहुत सी अच्छाई है I
बिना बात हसाती है, रुलाती है I
बड़े -बड़े ख्याब दिखलाती है I
क्योंकि, तन्हाई में भी है बहुत सी अच्छाई I
अपने आप से मिलबाती है I
ज़िंदगी जीने का तरीका सिखलाती है I
आपनो की याद दिलाती है I
बातें जो दफ़न हो गई है यादों की कब्र में उस से मिलबाती है I
क्योंकि, तन्हाई में भी बहुत सी अच्छाई है I
ख्यालों के मजधार में डुबोती है I
खुद पर भरोसा करना सिखलाती है I
क्योकि तन्हाई में भी बहुत सी अच्छाई है I”
Zara bhi farak nahi hu-ba-hu dhadkata hai
Ye dil nahi mere seene me tu dhadakta hai❤
ज़रा भी फर्क नहीं हू-ब-हू धड़कता है
ये दिल नहीं मेरे सीने में तू धड़कता है❤