kaise karoon mukadama us par usakee bewafai ka,
kamabakht ye dil bhee usee ka vakeel nikala…
कैसे करूं मुकदमा उस पर उसकी बेवफाई का,
कमबख्त ये दिल भी उसी का वकील निकला…
kaise karoon mukadama us par usakee bewafai ka,
kamabakht ye dil bhee usee ka vakeel nikala…
कैसे करूं मुकदमा उस पर उसकी बेवफाई का,
कमबख्त ये दिल भी उसी का वकील निकला…
Ikk tere bina jiona
Duja mar mar ke
Eh kaisi saja ho gayi zindagi meri nu..!!
ਇੱਕ ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਜਿਓਣਾ
ਦੂਜਾ ਮਰ ਮਰ ਕੇ
ਇਹ ਕੈਸੀ ਸਜ਼ਾ ਹੋ ਗਈ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਮੇਰੀ ਨੂੰ..!!
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…