kaise karoon mukadama us par usakee bewafai ka,
kamabakht ye dil bhee usee ka vakeel nikala…
कैसे करूं मुकदमा उस पर उसकी बेवफाई का,
कमबख्त ये दिल भी उसी का वकील निकला…
kaise karoon mukadama us par usakee bewafai ka,
kamabakht ye dil bhee usee ka vakeel nikala…
कैसे करूं मुकदमा उस पर उसकी बेवफाई का,
कमबख्त ये दिल भी उसी का वकील निकला…
मान लिखूँ सम्मान लिखूँ मैं।
आशय और बखान लिखूं मैं।
जिस नारी पर दुनिया आश्रित,
उसका ही बलिदान लिखूँ मैं।।
जीवन ऐसी बहती धारा,
जिसका प्यासा स्वयं किनारा,
पत्थर पत्थर अश्क उकेरे,
अधरों पर मुस्कान लिखूँ मैं।
मान——
कोमल है कमज़ोर नहीं है,
नारी है यह डोर नहीं है,
मनमर्ज़ी इसके संग करले
इतना कब आसान लिखूँ मैं
मान—-
बेटा हो या बेटी प्यारी,
जन्म सभी को देती नारी,
इसका अन्तस् पुलकित कोमल
इसके भी अरमान लिखूँ मैं
मान—-
हिम्मत से तक़दीर बदल दे,
मुस्कानों में पीर बदल दे,
प्रेम आस विश्वास की मूरत,
शब्द शब्द गुणगान लिखूँ मैं
मान——
kina kathor bna dita
dila tere ishq ne
begaana ho gya
taitho wakh ho ke
eh duniyaa v anjaan laggegairaa ch teri bhaal karke
na jaane kyu!! rab mera mainu jeen dawe
par mainu mere jeen di wajah na mile
ਕਿੰਨਾ ਕਠੋਰ ਬਣਾ ਦਿੱਤਾ
ਦਿੱਲਾ ਤੇਰੇ ਇਸ਼ਕ ਨੇ …. 💌
ਬੇਗਾਨਾ ਹੋ ਗਿਆ
ਤੈਥੋਂ ਵੱਖ ਹੋ ਕੇ
ਇਹ ਦੁਨੀਆ ਵੀ ਅਣਜ਼ਾਣ ਲੱਗੇ
ਗੈਰਾ ‘ਚ ਤੇਰੀ ਭਾਲ ਕਰਕੇ
ਨਾ ਜਾਣੇ ਕਿਉ !! ਰੱਬ ਮੇਰਾ ਮੈਨੂੰ ਜੀਣ ਦਵੇ
ਪਰ ਮੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਜੀਣ ਦੀ ਵਜਾਹ ਨਾ ਮਿਲੇ
✍️ Harsh