उसे जाते हुये मैंने रोका बहोत था
ये दिल अपनी सफाई मे चीखा बहोत था ,
जिस शफ मे खड़े थे हम अपनी सच्चाई लेके
उसमे झूठ बिका बहोत था ।
मैं थक गया था अपनी सफाई देके
पर रकीब का फसाना भरी बहोत था ।
……….अजय महायच .
Enjoy Every Movement of life!
उसे जाते हुये मैंने रोका बहोत था
ये दिल अपनी सफाई मे चीखा बहोत था ,
जिस शफ मे खड़े थे हम अपनी सच्चाई लेके
उसमे झूठ बिका बहोत था ।
मैं थक गया था अपनी सफाई देके
पर रकीब का फसाना भरी बहोत था ।
……….अजय महायच .
Vo sapneele lamhe kab kho gye pta hi na chala
Rengte the, kab khade ho gaye pta hi na chala
Khilaune to aaj bhi vahi hai, e waqt
Hum kab bade ho gaye pta hi na chala…🤞🏽🍂
वो सपनीले लम्हे कब खो गए पता ही ना चला,
रेंगते थे, कब खड़े हो गए पता ही ना चला,
खिलौने तो आज भी वही है, ए-वक्त,
हम कब बड़े हो गए पता ही ना चला…🤞🏽🍂
