उसे जाते हुये मैंने रोका बहोत था
ये दिल अपनी सफाई मे चीखा बहोत था ,
जिस शफ मे खड़े थे हम अपनी सच्चाई लेके
उसमे झूठ बिका बहोत था ।
मैं थक गया था अपनी सफाई देके
पर रकीब का फसाना भरी बहोत था ।
……….अजय महायच .
Enjoy Every Movement of life!
उसे जाते हुये मैंने रोका बहोत था
ये दिल अपनी सफाई मे चीखा बहोत था ,
जिस शफ मे खड़े थे हम अपनी सच्चाई लेके
उसमे झूठ बिका बहोत था ।
मैं थक गया था अपनी सफाई देके
पर रकीब का फसाना भरी बहोत था ।
……….अजय महायच .

Aksar tere takk aa ke mukki janda e
Kise manzil di khwahish ch meriyan socha da safar..!!
ਅਕਸਰ ਤੇਰੇ ਤੱਕ ਆ ਕੇ ਮੁੱਕ ਜਾਂਦਾ ਏ
ਕਿਸੇ ਮੰਜ਼ਿਲ ਦੀ ਖੁਆਹਿਸ਼ ‘ਚ ਮੇਰੀਆਂ ਸੋਚਾਂ ਦਾ ਸਫ਼ਰ..!!