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Vaada hai aapse || love hindi shayari || true love

Har pal mohobbat karne ka vaada  hai aapse❤️
Har pal sath nibhane ka vaada hai aapse🤗
Kabhi yeh Matt samjhna hum aapko bhool jayenge❌
Zindagi bhar sath chalne ka vaada hai aapse👫
Humein fir suhana nazara mila hai😍
Kyunki zindagi mein sath tumhara mila hai😇
Ab zindagi mein koi khwahish nhi Rahi🙌
Kyunki humein ab tumhari bahon ka sahara mila hai🙈

हर पल मोहब्बत करने का वादा है आपसे,❤️
हर पल साथ निभाने का वादा है आपसे,🤗
कभी ये मत समझ न हम आपको भूल जायेंगे,❌
जिंदगी भर साथ चलने का वादा है आपसे।👫
हमे फिर सुहाना नज़ारा मिला है, 😍
क्योंकि जिंदगी में साथ तुम्हारा मिला है, 😇
अब जिंदगी में कोई ख्वाइश नही रही, 🙌
क्योंकि हमे अब तुम्हारी बाहों का सहारा मिला है।🙈

Title: Vaada hai aapse || love hindi shayari || true love

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


humein to har shakhas bekaar Mila || sad but true || best hindi shayari

Na dosti Mili na pyar Mila
Humein to bas Intezaar mila😇
Logo ko Mila hoga insano mein khuda
Humein to har shakhas bekaar mila🙃

ना दोस्ती मिली ना प्यार मिला
हमें तो बस इंतजार मिला😇
लोगो को मिला होगा इंसानों में खुदा
हमें तो हर शख्स बेकार मिला🙃

Title: humein to har shakhas bekaar Mila || sad but true || best hindi shayari


माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry

पहली धड़कन भी मेरी धडकी थी तेरे भीतर ही,
जमी को तेरी छोड़ कर बता फिर मैं जाऊं कहां.

आंखें खुली जब पहली दफा तेरा चेहरा ही दिखा,
जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा.

खामोशी मेरी जुबान को  सुर भी तूने ही दिया,
स्वेत पड़ी मेरी अभिलाषाओं को रंगों से तुमने  भर दिया.

अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने भंडार भरे,
मैं भले नाकामयाब रही फिर भी मेरे होने का तुमने अहंकार भरा.

वह रात  छिपकर जब तू अकेले में रोया करती थी,
दर्द होता था मुझे भी, सिसकियां मैंने भी सुनी थी.

ना समझ थी मैं इतनी खुद का भी मुझे इतना ध्यान नहीं था,
तू ही बस वो एक थी, जिसको मेरी भूख प्यार का पता था.

पहले जब मैं बेतहाशा धूल मैं खेला करती थी,
तेरी चूड़ियों तेरे पायल की आवाज से डर लगता था.

लगता था तू आएगी बहुत  डाटेंगी और कान पकड़कर मुझे ले जाएगी,
माँ आज भी मुझे किसी दिन धूल धूल सा लगता है.

चूड़ियों के बीच तेरी गुस्से भरी आवाज सुनने का मन करता है,
मन करता है तू आ जाए बहुत डांटे और कान पकड़कर मुझे ले जाए.

जाना चाहती हूं  उस बचपन में फिर से जहां तेरी गोद में सोया करती थी,
जब काम में हो कोई मेरे मन का तुम बात-बात पर रोया करती थी.

जब तेरे बिना लोरियों  कहानियों यह पलके सोया नहीं करती थी,
माथे पर बिना तेरे स्पर्श के ये आंखें जगा नहीं करती थी.

अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,
चाहती हूं पूरा करना तेरे सपनों में देखी हर बातों को.

खुश होगी माँ एक दिन तू भी,
जब लोग मुझे तेरी बेटी कहेंगे.

Title: माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry