kuch pal hi to yaad aate han vo to nhi
baton ki baraat laate han vo to nhi
vo naa aaye ab fark nhi padta ab uske supne khaate han vo to nhi
Sabi
kuch pal hi to yaad aate han vo to nhi
baton ki baraat laate han vo to nhi
vo naa aaye ab fark nhi padta ab uske supne khaate han vo to nhi
Sabi
kine chir to nahi vekhiyaa ohnu
lagda bhul gyaa mainu
kithe na kite taan yaad augi ohnu meri
ki karda si koi kmla apne ton wadhke meri
ਕਿਣੇ ਚਿਰ ਤੋ ਨਹੀਂ ਵੇਖਿਆ ਓਹਨੂੰ
ਲਗਦਾ ਭੁੱਲ ਗਿਆ ਮੈਨੂੰ
ਕਿਥੇ ਨਾ ਕਿਥੇ ਤਾਂ ਯਾਦ ਆਉਗੀ ੳਹਨੂੰ ਮੇਰੀ
ਕਿ ਕਰਦਾ ਸੀ ਕੋਈ ਕਮਲਾ ਆਪਣੇ ਤੋਂ ਵਧਕੇ ਫ਼ਿਕਰ ਮੇਰੀ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।