na charkhe te tand painda e
na trinjhna da kath deeda e
na baabeya da mela lagda e
hun pind v injh jaapda e
jive ujdheyaa baag maali da e
har ghar iko supna e
asi ja canada vasna e
ਨਾ ਚਰਖੇ ਦੇ ਤੰਦ ਪੈਦਾ ਏ
ਨਾ ਤ੍ਰਿੰਜਣਾ ਦਾ ਕੱਠ ਦੀਦਾ ਏ
ਨਾ ਬਾਬਿਆ ਦਾ ਮੇਲਾ ਲੱਗਦਾ ਏ
ਹੁਣ ਪਿੰਡ ਵੀ ਇੰਝ ਜਾਪਦਾ ਏ
ਜਿਵੇ ਉਜੜਿਆ ਬਾਗ ਮਾਲੀ ਦਾ ਏ
ਹਰ ਘਰ ਇਕੋ ਸੁਪਨਾ ਏ
ਅਸੀ ਜਾ ਕਨੇਡਾ ਵੱਸਣਾ ਏ
..ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਔਲਖ
सुना है लोग तुझे आँखें भरकर देखते हैं , है मन में क्या उनके ये तो सवाल कर ।
माना लोगों की फितरत अब अच्छी नहीं , अपनी इज्जत का तू तो ज़रा ख्याल कर ।।
बादस्तूर चलती रही नाराजगी जिंदगी में , वक्त बेवक्त काफिर सा न मेरा हाल कर ।
मेरी आदतों में शूमार है तेरी मोहब्बत का सबब , खुदा का शुक्र मना बेवजह न मलाल कर ।।
बागी मिजाज़ रहा दिल का चाहतों के गुबार में , जिससे कभी मोहब्बत थी उससे अब नफरत भी बेमिसाल कर ।
क्या हुआ जो दुआ भी कुबूल न हुई , हासिल कर अपने दर्द को कुछ तो अब बवाल कर ।।