वो कहते हैं कि हम बदल गए
कोई उन्हें बताओ,सब आपकी मेहरबानी है|
जब हमें जरूरत थी तब आपने हमें अकेलापन दे दिया||
हमनें आपकी राह पर घंटो नजर टिकाई है|
पर आज शुक्रीया है आपका आपने हमें अपने और परायों का फक्र दिखा दिया||
वो कहते हैं कि हम बदल गए
कोई उन्हें बताओ,सब आपकी मेहरबानी है|
जब हमें जरूरत थी तब आपने हमें अकेलापन दे दिया||
हमनें आपकी राह पर घंटो नजर टिकाई है|
पर आज शुक्रीया है आपका आपने हमें अपने और परायों का फक्र दिखा दिया||

कड़ी धूप हो या हो शीतकाल,
हल चलाकर न होता बेहाल.
रिमझिम करता होगा सवेरा,
इसी आस में न रोकता चाल.
खेती बाड़ी में जुटाता ईमान,
महान पुरूष हैं, है वो किसान.
छोटे-छोटे से बीज बोता,
वही एक बड़ा खेत होता.
जिसकी दरकार होती उसे,
बोकर उसे वह तभी सोता.
खेतो का कण-कण हैं जिसकी जान,
महान पुरूष है, है वो किसान.
तरुण चौधरी