हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
chandi rangiye tainu sone ch madhda
dekhu kive koi me bhae .. na gadhda
ਚਾਂਦੀ ਰੰਗੀਏ ਤੈਨੂੰ ਸੋਨੇ ਚ‘ ਮੜਦਾ
ਦੇਖੂ ਕਿਮੇ ਕੋਈ ਮੈ ਭੈ… ਨਾ ਗੜਦਾ
