हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
कान्हा तेरी भक्ति में मीरा बन जाऊ
राम तेरी भक्ति में शबरी बन जाऊ
तूने जो ना चाहा ऐसा कर जाऊ
तेरी खातिर मैं खुदको वार जाऊ
अगर हो साथ तेरा तो ऐसा मकाम पाऊँ
तेरे लिए सारी दुनिया से लड़ जाऊ
तेरे आशीर्वाद से ही ये दुनिया संभली
मेरी गिरते जिंदगी को तूने थामली
उसमे खुशियाँ तूने ही डाली
तेरे होने से ही हो सारे काज पूरे
बिना तेरे लगे मायूसी और ज़िंदगी अधूरी
जिंदगी में कोई प्यार से प्यारा नही मिलता,
जिंदगी में कोई प्यार से प्यारा नही मिलता,
जो है पास आपके उसको सम्भाल कर रखना,
क्योंकि एक बार खोकर प्यार दोबारा नही मिलता.