हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
जितनी शिद्दत से लिखा था उनका नाम हमने दिल के आइने पर, 💖💖
बस!!!… .
उतनी ही शिद्दत से उसने उस आइने को चकनाचूर कर दिया 💔
ਸੱਜਣਾਂ ਯਾਦ ਤਾਂ ਆਵਾਗੇ
ਕਦੇ ਦਰਦ ਬਣਕੇ
ਕਦੇ ਹੰਝੂ ਬਣਕੇ
ਕਦੇ ਯਾਦ ਬਣਕੇ
ਪ੍ਰੀਤ ਕਦੇ ਖੁਆਬ ਬਣਕੇ