हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली

samundar nadiyaan jheelan te akhan
sareyaan vich pani hunda
farak bas gehrai da hunda
ਸਮੁੰਦਰ, ਨਦੀਆਂ, ਝੀਲਾਂ ਤੇ ਅੱਖਾਂ
ਸਾਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਹੁੰਦਾ
ਫਰਕ ਬਸ ਗਹਿਰਾਈ ਦਾ ਹੁੰਦਾ