हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
माना हम अदब से बात नही करते पर
ये मानो मतलब से बात नही करते,
ये नरम लहजा ,प्यारी बातें तेरे लिए है,
यकीन मानो हम हर किसीसे ऐसे बात नही करते।
हमारे बिन तुम अधूरे ही रहोगे,
किसी ने चाहा शिद्दत से ऐसा तुम खुद कहोगे,
हम न होंगे मौजूद तो ये आलम भी कहेगा,
मिलेंगे तुझको बहुत पर हम जैसा पागल कोई ओर