हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
माना मुझे अब जरूरत नहीं तेरी , पर जिंदगी में एक मलाल तो है ।
कबूलनामा भी दे चुके महफिलों में पर , लोगों की निगाहों में कुछ सवाल तो है ।।
सपनों सा लगता एक ख्वाब तो है , मेरा हर अंदाज़ लाजवाब तो है ।
चाहता नहीं मेरी कलम से कोई बेइज्जत हो जाए , वरना मेरे पास भी कुछ लोगों का हिसाब तो है ।।
हाँ मोहब्बत भूल थी मेरी , आज बेबाकी से एक गुनाह कुबूल करता हूँ ।
कुछ काले किस्से हैं बीते हुए लम्हें , अब हर किस्से को मशहूर करता हूँ ।।
जिद्दी है मेरा दिल बड़ा , इसे आज मैं ज़रा मजबूर करता हूँ ।
बहुत हो चुकी मोहब्बत में नाफरमानी , सिर आँखों पर अपना गुरूर करता हूँ ।।
Khid jawe mera dil milan te
Ohde khayalan di ikk shooh nu..!!
Uston bina eh saah vi na kam de ne
Oh lazmi e meri rooh nu..!!
ਖਿੜ ਜਾਵੇ ਮੇਰਾ ਦਿਲ ਮਿਲਣ ‘ਤੇ
ਓਹਦੇ ਖਿਆਲਾਂ ਦੀ ਇੱਕ ਛੂਹ ਨੂੰ..!!
ਉਸਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਇਹ ਸਾਹ ਵੀ ਨਾ ਕੰਮ ਦੇ ਨੇ
ਉਹ ਲਾਜ਼ਮੀ ਏ ਮੇਰੀ ਰੂਹ ਨੂੰ..!!