हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
badalatee cheejen hamesha achchhee lagatee hai…
lekin, badalate hue apane kabhee achchhe nahin lagate..
बदलती चीजें हमेशा अच्छी लगती है… लेकिन,
बदलते हुए अपने कभी अच्छे नहीं लगते…
