हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
raat kyu tu udaas hai
kush pal thehar fir subaah ki aas hai
रात क्यों तू उदास है
कुछ पल ठहर फिर सुबह की आस है
ਇਨ age’ ਅੱਥਰਾ ਮੁੰਡਾ ਨੀ
ਤੂੰ ਸਮਜੀ ਨਾ ਮੈਨੂੰ ਗੁੰਡਾ ਨੀ
ਕੰਮ ਕਾਰ ਬੜੇ ਉਖਾ ਆ
ਜਿਨਾ ਰਾਹਾਂ ਤੇ ਮੈ ਤੁਰਿਆ ਹਾ।