हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Aaj ek bar fir man me svaal aaya hai
kisi ke hisse me tum or mere hisse me bas tumhari yaado ka dhundla saya hai💫
आज एक बार फिर मन में सवाल आया है
किसी के हिस्से में तुम और मेरे हिस्से में बस तुम्हारी यादों का धुंधला साया है 💫
