हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Kujh usdi aakad c
te kujh mera gussa c
me nakhre kardi c,
subaah usda v puttha c
ਕੁਝ ਉਸਦੀ ਆਕੜ ਸੀ,
ਤੇ ਕੁਝ ਮੇਰਾ ਗੁੱਸਾ ਸੀ …
ਮੈਂ ਨਖਰੇ ਕਰਦੀ ਸੀ,
ਸੁਭਾਅ ਉਸਦਾ ਵੀ ਪੁੱਠਾ ਸੀ..।।
