हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली

Dil dolat hai teri jadon marzi karach lawi
eh jaan gareeban di jithe marji varat lawi
ਦਿਲ ਦੌਲਤ ਹੈ ਤੇਰੀ ਜਦੋਂ ਮਰਜੀਂ ਖਰਚ ਲਵੀ ,
ਇਹ ਜਾਨ ਗਰੀਬਾਂ ਦੀ ਜਿੱਥੇ ਮਰਜੀਂ ਵਰਤ ਲਵੀਂ.