Bhawe dil de ambar vich oh simat ke reh na saki
par meriyaan yaadan ton
oh door reh na saki
Bhawe dil de ambar vich oh simat ke reh na saki
par meriyaan yaadan ton
oh door reh na saki
Sabke saamne dil ki baat nahi hoti,
Akele baat karne ke liye mulakaat nahi hoti,
Toh apni baat chitthi mein likh kar bhej dunga,
Ke zaroorat padne pe tumhare liye jaan bhi de dunga❤
सबके सामने दिल की बात नही होती
अकेले बात करने के लिए मुलाकात नहीं होती
तो अपनी बात चिट्ठी में लिख कर भेज दूंगा
कि ज़रूरत पड़ने पे तुमारे लिए जान भी दे दूंगा❤
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है