ज़िन्दगी के लिए इक ख़ास सलीक़ा रखना
अपनी उम्मीद को हर हाल में ज़िन्दा रखना
उसने हर बार अँधेरे में जलाया ख़ुद को
उसकी आदत थी सरे-राह उजाला रखना
आप क्या समझेंगे परवाज़ किसे कहते हैं।
आपका शौक़ है पिंजरे में परिंदा रखना
बंद कमरे में बदल जाओगे इक दिन लोगो
मेरी मानो तो खुला कोई दरीचा रखना
क्या पता राख़ में ज़िन्दा हो कोई चिंगारी
जल्दबाज़ी में कभी पॉव न अपना रखना
वक्त अच्छा हो तो बन जाते हैं साथी लेकिन
वक़्त मुश्किल हो तो बस ख़ुद पे भरोसा रखना
Vo sapneele lamhe kab kho gye pta hi na chala
Rengte the, kab khade ho gaye pta hi na chala
Khilaune to aaj bhi vahi hai, e waqt
Hum kab bade ho gaye pta hi na chala…🤞🏽🍂
वो सपनीले लम्हे कब खो गए पता ही ना चला,
रेंगते थे, कब खड़े हो गए पता ही ना चला,
खिलौने तो आज भी वही है, ए-वक्त,
हम कब बड़े हो गए पता ही ना चला…🤞🏽🍂