खुशबू नहीं है मुझमें,
पर गुलशन महकाएं बहुत है...
मुझे आज़माया नहीं किसी ने,
मैनें अपनें आज़माएं बहुत हैं...
मैं रौनक पसंद हूं पर रौनक नहीं है मुझमें,
बुला रहे हो महफिल में वो झलक नहीं मुझमें...
इंतजाम मेरी खातिर बस इतना कर लेना
कड़वा हूं मैं,
कुछ कहूं तो मेरे होंठो पर ज़हर रख देना....
मुक्कमल भले प्यार हमारा न हुआ……..
उनका हक जताना भी कयामत था भूल जाना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है
गलत साबित हुए हमेशा…………
उनका हमे आजमाना भी कयामत था ठुकराना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है
किताब के कहीं किसी पन्ने पर तो होंगे जरूर……..
उनका याद आना भी कयामत था भूल जाना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है