ये मोहब्बत संभाल कर रखना!
ना कि नफरत संभाल कर रखना!
भूल जाना नही कभी मुझे जाकर!
मेरी आदत संभाल कर रखना!!
हर्ष ✍️
ये मोहब्बत संभाल कर रखना!
ना कि नफरत संभाल कर रखना!
भूल जाना नही कभी मुझे जाकर!
मेरी आदत संभाल कर रखना!!
हर्ष ✍️
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है
Rabba tun hi hassona ey
Rabba tun hi ravona ey
Pehla pyar karwona ey
Te pher dil tadvona ey
Changi gall ni