ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Enjoy Every Movement of life!
ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Masum jehi zindarhi te dass tu
Eh ki kehar kamawein..!!
Na koi suneha aunda tera
Na aap kol tu aawein..!!
ਮਾਸੂਮ ਜਿਹੀ ਜ਼ਿੰਦੜੀ ‘ਤੇ ਦੱਸ ਤੂੰ
ਇਹ ਕੀ ਕਹਿਰ ਕਮਾਵੇਂ..!!
ਨਾ ਕੋਈ ਸੁਨੇਹਾ ਆਉਂਦਾ ਤੇਰਾ
ਨਾ ਆਪ ਕੋਲ ਤੂੰ ਆਵੇਂ..!!
