ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Enjoy Every Movement of life!
ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Muddton baad darwaze par koi aaya hai
Dar hai, kahi mera hi saya to nahi…🙌
मुद्दतों बाद दरवाज़े पर कोई आया है,
डर है, कहीं मेरा ही साया तो नहीं…🙌

Pathar sutteya dil de samandar vich ohne
soch ke k shayed tar gya hona
pr ohnu ni pata e kinni dhungai te gya hona