ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।

me kade raati kalle beh ke chan taareyaa nu locheyaa hi ni
tu bas meri hoja
es ton wadh ke me hor kujh kade socheyaa hi ni
ਮੈਂ ਕਦੇ ਰਾਤੀ ਕੱਲੇ ਬਹਿ ਕੇ ਚੰਨ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਲੋਚਿਆ ਹੀ ਨੀ
ਤੂੰ ਬਸ ਮੇਰਾ ਹੋਜਾ
ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਕੇ ਮੈ ਹੋਰ ਕੁਝ ਕਦੇ ਸੋਚਿਆ ਹੀ ਨੀ