ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Enjoy Every Movement of life!
ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।

chen udh gya dil da
naa neend rahi raatan di
tu kaisa rog la dita
aadat pe gai
teriyaan yaadan di, mulakaatan di
ਚੈਨ ਉੱਡ ਗਿਆ ਦਿਲ ਦਾ
ਨਾ ਨੀਂਦ ਰਹੀ ਰਾਤਾਂ ਦੀ
ਤੂੰ ਕੈਸਾ ਰੋਗ ਲਾ ਦਿਤਾ
ਆਦਤ ਪੈ ਗਈ
ਤੇਰੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਦੀ, ਮੁਲਾਕਾਤਾਂ ਦੀ