ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Enjoy Every Movement of life!
ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Manzil ka naraaz hona bhi zayaz tha..
ham bhi toh ajjnabi raahon se dil lagaa baithe the..
मंजिल का नाराज होना भी जायज था…
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे…
Milange ik din jaroor
me poori umeed rakhi aa
baki sab tere hath ch ae
tu meri kini udeek rakhi aa
ਮਿਲਾਂਗੇ ਇਕ ਦਿਨ ਜਰੂਰ
ਮੈਂ ਪੁਰੀ ਉਮੀਦ ਰੱਖੀ ਆ
ਬਾਕੀ ਸਭ ਤੇਰੇ ਹੱਥ ਚ ਏ
ਤੂੰ ਮੇਰੀ ਕਿੰਨੀ ਉਡੀਕਾ ਰੱਖੀ ਆ