ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Enjoy Every Movement of life!
ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
ambron tutte taare vekh
mangdi e mantaan gairaan de naal
krke banjar jameen
puchdi e hun
suke rukhan de haal
ਅੰਬਰੋਂ ਟੁੱਟੇ ਤਾਰੇ ਵੇਖ
ਮੰਗਦੀ ਏ ਮੰਨਤਾਂ ਗੈਰਾਂ ਦੇ ਨਾਲ
ਕਰਕੇ ਬੰਜ਼ਰ ਜ਼ਮੀਨ
ਪੁਛਦੀ ਹੁਣ ਸੁੱਕੇ ਰੁਖਾਂ ਦੇ ਹਾਲ
धड़कनों की सिफारिश पर हम चाय पर गए
वरना वो गुलाबी शाम हमसे कजा न होता
अब सामने ही बैठा है महबूब तो क्या बात करे हम
निगाहे बात कर लेता तो वो खफा न होता