ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Enjoy Every Movement of life!
ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Dhundli jehi kismat dhundle jehe supne
supne hi reh gaye o
supne hi supne ….
ਧੁੰਦਲੀ ਜਿਹੀ ਕਿਸਮਤ ਧੁੰਦਲੇ ਜਿਹੇ ਸੁਪਨੇ
ਸੁਪਨੇ ਹੀ ਰਹਿ ਗਏ ਉ
ਸੁਪਨੇ ਹੀ ਸੁਪਨੇ ….
TaJpreet kaur
