जिंदा हैं सिरफ कहने के लिए
ये सांसे तो उसी दिन थम गई थी
जिस दिन आप ने छोड़ दिए थे हम गैरों के लिए
Enjoy Every Movement of life!
जिंदा हैं सिरफ कहने के लिए
ये सांसे तो उसी दिन थम गई थी
जिस दिन आप ने छोड़ दिए थे हम गैरों के लिए

देखा है दुनिया का दस्तूर उसने,
वो किसी की भी सुनता नहीं है...
लगा देता है अदालत चलती राहों में,
उसके दुश्मन भी चुनता वहीं है...
सही है ?
क्या दुनिया से नज़रें मिला कर चलना,
जीना है आज तो रास्ता बस यही है...
छोड़ आया था दोस्तों का काफिला पीछे, मुड़ कर देखा तो सारे दुश्मन वहीं है...