जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
Mom se hain gir rahe armaan yun pighal ke
Angaro mein sulagh rahi kuch aag halke halke
Mausam badal rahe palkein bhiga rahe hain
Kuch lamhe beete kal ke kuch lamhe aaj kal ke
मोम से हैं गिर रहे अरमां यूं पिघल के
अंगारों में सुलग रही कुछ आग हल्के हल्के
मौसम बदल रहे पलकें भीगा रहे हैं
कुछ लम्हे बीते कल के कुछ लम्हे आज कल के
Hun lodh nahi hai teri
tu vapis hun aai naa
je aana hai taa soch lai
kyuki vapis kade fer jai naa
ਹੁਣ ਲੋਡ਼ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤੇਰੀ
ਤੂੰ ਵਾਪਿਸ ਹੂਣ ਆਈ ਨਾਂ
ਜੇ ਆਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸੋਚ ਲਈ
ਕਿਓਂਕਿ ਵਾਪਿਸ ਕਦੇ ਫੇਰ ਜਾਈ ਨਾਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷