जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
Enjoy Every Movement of life!
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
Be yourself a reflection of hard work and achieve🍁
Khabar khabar ki aas mein wo bekhabar nikal gaye ,
Ummed na thi phir bhi Jane kiyo woh badal gaye…..!!!
खबर खबर की आस में वो बेखबर निकल गए
उम्मीद न थी फिर भी जाने क्यों वो बदल गए…..!!!