जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
Enjoy Every Movement of life!
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
ਕਹਾਣੀ ਏਹ ਕਾਦੀ ਪਿਆਰ ਦੀ
ਪਿਆਰ ਲਈ ਜੇ ਸਿਫ਼ਤਾਂ ਕਿਤੀ ਜਾਵੇ ਯਾਰ ਦੀ
ਜੇ ਕਦਰ ਨਹੀਂ ਓਹਨੂੰ ਤਾਂ ਛੱਡ ਕੀ ਲੇਣਾ
ਗਲਾਂ ਫੇਰ ਕਾਦੀ ਕਿਤੀ ਜਾਵੇ ਓਹਦੇ ਖਿਆਲ ਦੀ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
Fursat Nahi Unhe Humse Kuch Batein Karne Kee,
Isliye Ab Har Waqt Khamosh Rehte Hain!