जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
आज दीदार ना हुआ उनका एक बार भी, नाराज से लगते हैं..
सुनाई देती है जैसे ही दस्तक कोई, बार- बार दरवाजे पे भगते हैं..
हर बार कोई और होता है, ख्वाब टूट जाता है, नींद से जगते हैं..
अरे कोई तो खबर करदो उन्हें, इंतजार में हैं, वो अपने से लगते हैं..❤️
Eh kaliyan raatan de chann tare
Yaad sajjna di hi dilaunde ne..!!
Sanu ishq de maare jhalleya nu
Dukh birha vale staunde ne..!!
ਇਹ ਕਾਲੀਆਂ ਰਾਤਾਂ ਦੇ ਚੰਨ ਤਾਰੇ
ਯਾਦ ਸੱਜਣਾ ਦੀ ਹੀ ਦਿਲਾਉਂਦੇ ਨੇ..!!
ਸਾਨੂੰ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਮਾਰੇ ਝੱਲਿਆਂ ਨੂੰ
ਦੁੱਖ ਬਿਰਹਾ ਵਾਲੇ ਸਤਾਉਂਦੇ ਨੇ..!!