जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
Enjoy Every Movement of life!
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
Kisi ka chup hona
apni hoshiyari mat samjhna
wo aapki nahi janaab
apni hoshiyaari ki wajah se chup hai
किसी का चुप होना
अपनी होशियारी मत समझना,
वो आपकी नहीं जनाब,
अपनी होशियारी की वजह से चुप है♠️
