जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
खवाहिशों का ये दौर भी थम जयेगा
था यकीन , जो मेरा है वो मिल जाएगा ,
उम्र भर से सिकुड़ा था जो तमन्नाओ का फूल
क्या मालूम था तुझे देख वो खिल जाएगा ।
है उम्मीद तू साथ चलेगा जो मेरे उम्र भर
टूटे खवाबों का ये मेरा टाकिया सील जाएगा ।
सबर करुगा तेरे मेरे मुकम्मल होने का
यू ही एक दिन मेरा जीवन तुझमे ढल जाएगा ।
Yeh zindagi ek Aashiq jaisi hai
Agar Man se chaha toh haseen hai
Agar dimaag se chaha toh rangeen hai 💯
यह ज़िन्दगी एक आशिक़ जैसी है
अगर मन से चाहा तो हसीन है
अगर दिमाग से चाहा तो रंगीन है 💯