जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
Ki gal dila,
Aaj kal chup-chup ja rehan lga.
Koi galti hoi sade ton,
Jaan pyar ghat gya dil tere chh…
ਤੇਰਾ ਰੋਹਿਤ…✍🏻
Kya galat fehmi mein reh jane ka sadma kuch nahi,
Vo mujhe samjha to sakta tha ke esa kuch nahi
Ishq se bach kar bhi banda kuch nahi hota magar
Ye bhi sach hai ishq mein bande ka bachta kuch nahi…..🖤🥀
क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं,
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर,
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं…. 🖤🥀