जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।
रख सकों तो एक निशानी हूँ मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं रोक ना पाए जिसको ये सारी दुनिया वो एक बूंद आँख का पानी हूँ मैं... सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमें कितना भी गहरा जख़्म दे कोई उतना ही ज्यादा मुस्कुरानें की आदत है हमें.. इस अजनबी दुनिया में अकेला ख़्वाब हूँ मैं सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं.. आँख से देखोगे तो खुश पाओगे दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं अगर रख सकों तो एक निशानी हूं मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं...
Bulleh shah ik sauda kita, peeta jehar pyaala peeta
na kujh nafa na totta leeta, darad dukha di gathrri bhari
lai bedardaa sang yaari
ਬੁੱਲ੍ਹੇ ਸ਼ਾਹ ਇਕ ਸੌਦਾ ਕੀਤਾ, ਪੀਤਾ ਜ਼ਹਿਰ ਪਿਆਲਾ ਪੀਤਾ,
ਨਾ ਕੁਝ ਨਫ਼ਾ ਨਾ ਟੋਟਾ ਲੀਤਾ, ਦਰਦ ਦੁੱਖਾਂ ਦੀ ਗਠੜੀ ਭਾਰੀ
ਲਾਈ ਬੇਦਰਦਾਂ ਸੰਗ ਯਾਰੀ