
Zid hi fad lyi e akhiyan ne..!!

मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने
ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैं ने
अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने
उन्हें अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है
कि कुछ मुद्दत हसीं ख़्वाबों में खो कर जी लिया मैं ने
बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो
बहुत दुख सह लिए मैं ने बहुत दिन जी लिया मैं ने
Pyar lutawan teri deewani ho
Koi reham na samjhi..!!
Mein sach kaha yara mereya
Tu veham na samjhi..!!
ਪਿਆਰ ਲੁਟਾਵਾਂ ਤੇਰੀ ਦੀਵਾਨੀ ਹੋ
ਕੋਈ ਰਹਿਮ ਨਾ ਸਮਝੀਂ..!!
ਮੈਂ ਸੱਚ ਕਹਾਂ ਯਾਰਾ ਮੇਰਿਆ
ਤੂੰ ਵਹਿਮ ਨਾ ਸਮਝੀਂ..!!