Aive gairaan piche bhajh, na eh zindagi barbaad kar
bandeyaa, tu apne andron apne aap di talaash kar
ਐਂਵੇਂ ਗੈਰਾਂ ਪਿੱਛੇ ਭੱਜ
ਨਾ ਇਹ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਬਰਬਾਦ ਕਰ
ਬੰਦਿਆ, ਤੂੰ ਆਪਣੇ ਅੰਦਰੋਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਦੀ ਤਲਾਸ਼ ਕਰ
Aive gairaan piche bhajh, na eh zindagi barbaad kar
bandeyaa, tu apne andron apne aap di talaash kar
ਐਂਵੇਂ ਗੈਰਾਂ ਪਿੱਛੇ ਭੱਜ
ਨਾ ਇਹ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਬਰਬਾਦ ਕਰ
ਬੰਦਿਆ, ਤੂੰ ਆਪਣੇ ਅੰਦਰੋਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਦੀ ਤਲਾਸ਼ ਕਰ
देखती हु उन्हें रोज़ खिड़की से कुछ तलाश करते हुए शायद खुद की ज़मीर को खोजते हैँ
और खुद ही ना जवाब पाकर .. चुप चाप चले जातें हैँ
शायद वो समझ नी पाते जिसे वो खोजते वो उनका ज़मीर नी उनके अंदर का टुटा प्यार है ..
हर रोज़ बस अड़े पर दीखते हैँ वो ..
और फिर भी अपने घर से ना जाने कैसे मेरे घर तक आजाते हैँ .. आसमान मे देख कर कहते हैँ की..भूल जाता हूँ अपना घर
इश्क़ का नशा जो तेरा अब तक चढ़ा है ..
देखती हु वो बैग दिया हुआ मेरा .. आज तक अपने संघ रखते हैँ मानो जैसे कलेजे को ठंडक देने वाला जलजीरा हो ..या आँखों को सुलघाने वाला चमकता हीरा हो ..
पर बुधु जो हैँ इन सबमे अपना रुमाल ही भूल जाते हैँ .
जानती हु वो बस मुझे याद करते हैँ ..
तभी तो शीशे के सामने आने से हटते हैँ
अपनी शकल बता कर मेरी शकल भूलने से डरते हैँ
पहले सामने थे मेरे देखती हु अब ऊपर से वो इश्क़ जो मेरा था वो जो खो गया…..
tum guzar jao khareeb se
woh bhi kese mulaqaat se kam nhi
tera diya huya gamm bhi hume kese inam se kam nhi