जिंदगी के सफर में हर शख्स अपना सा मालूम होता है
जब तलक किसी से कोई उम्मीद की डोर ना बांधी जाए..
Enjoy Every Movement of life!
जिंदगी के सफर में हर शख्स अपना सा मालूम होता है
जब तलक किसी से कोई उम्मीद की डोर ना बांधी जाए..
Soch raha tha k jawab kya bheju,
aap jaise dost ko toofa kya bheju,
guldasta bhejna to bewakufi hogi,
kyu k jo khud gulab hai use gulab kya bheju…?
तलाश लो ये जिस्म मगर, रूह तक कैसे जाओगे,
छान लो शहर सारा मगर, दर तक कैसे जाओगे,
आओगे जब वापस तो, नज़रें झुकी होगी तुम्हारी
तड़पेगा वो जिस्म ओर तुम, गुनहगार बन जाओगे...