जिंदगी के सफर में हर शख्स अपना सा मालूम होता है
जब तलक किसी से कोई उम्मीद की डोर ना बांधी जाए..
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।
Dekh Mujhe tabib aaj pucha jo Haalat-e-Mijaj
Kahne laga ki la-illaj band hu mein Khuda nahi🙃
Chehre tera bhi jard hai aah.. laboon pe sard hai
Ye toh Miyan woh Dard hai jiska koi dawa nahi💯
देख मुझे तबीब आज पूछा जो हालत-ए-मिज़ाज
कहने लगा कि ला-इलाज बंदा हूँ मैं ख़ुदा नहीं🙃
चेहरा तिरा भी ज़र्द है आह लबों पे सर्द है
ये तो मियाँ वो दर्द है जिस की कोई दवा नहीं💯