जिन्दगी कहा शुरु कहा खत्म हो जाती हे
जो रोज दिखती वो दिख्ना कम् हो जाती हैं
जिस मा बिना न होती थी बछ्पन की सुबह
उसे वृद्धाश्रम देख आखे नम हो जाति हे
Enjoy Every Movement of life!
जिन्दगी कहा शुरु कहा खत्म हो जाती हे
जो रोज दिखती वो दिख्ना कम् हो जाती हैं
जिस मा बिना न होती थी बछ्पन की सुबह
उसे वृद्धाश्रम देख आखे नम हो जाति हे
गलती मेरी ना होने पर भी मुझे गलत बनाया गया है
एक दफा नही मुझे कई बार सताया गया है ,
अब क्या ही सुनाई मैं अपनी मोहब्बत की दास्तां
पूरी महफिल में मुझे बेवफा बताया गया है ।
ginatee mein zara kamazor hoon,
jakhm behisaab na diya karo.…
गिनती में ज़रा कमज़ोर हूं,
जख्म बेहिसाब ना दिया करो.…