जिन्दगी कहा शुरु कहा खत्म हो जाती हे
जो रोज दिखती वो दिख्ना कम् हो जाती हैं
जिस मा बिना न होती थी बछ्पन की सुबह
उसे वृद्धाश्रम देख आखे नम हो जाति हे
जिन्दगी कहा शुरु कहा खत्म हो जाती हे
जो रोज दिखती वो दिख्ना कम् हो जाती हैं
जिस मा बिना न होती थी बछ्पन की सुबह
उसे वृद्धाश्रम देख आखे नम हो जाति हे
kise gair pichhe zindagi ton pehla
zindagi den wale baare soch lyaa karo
ਕਿਸੇ ਗੈਰ ਪਿੱਛੇ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਮੁਕਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ,
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਬਾਰੇ ਸੋਚ ਲਿਆ ਕਰੋ..
मोहब्बत धूप में छाँव की तरह है
धूप जमाने की तरह
तुम छाँव में रुकना मत यही छाँव ठण्ड में तुम्हें सतायेगी
ठण्ड समझदार की तरह
ये ठण्ड तुम्हें धूप की ओर ले जाएगी
धूप तुम्हे अंधेरे में छोड़ जाएगी
अंधेरे दो तरह की है
पहले में मां बाप साथ है दूसरे में उनकी याद
इसीलिये तो मां बाप अंधेरो में जीना सिखाते है
ताकी जब दूसरा अंधेरा आए तो तुम कहो
अंधेरो आओ अब हम तुम्हें रास्ता दिखाते है