जिन्दगी कहा शुरु कहा खत्म हो जाती हे
जो रोज दिखती वो दिख्ना कम् हो जाती हैं
जिस मा बिना न होती थी बछ्पन की सुबह
उसे वृद्धाश्रम देख आखे नम हो जाति हे
जिन्दगी कहा शुरु कहा खत्म हो जाती हे
जो रोज दिखती वो दिख्ना कम् हो जाती हैं
जिस मा बिना न होती थी बछ्पन की सुबह
उसे वृद्धाश्रम देख आखे नम हो जाति हे
मुझे भी तीर की तरह बहुत कुछ चुभता हैं 🥺
बस एक तस्वीर की तरह खामोश रहती हुं😶
खामोशियां मेरी मुझसे बातें करती है
हर दर्द खामोशियों का समझती रहती हूं
खामोशी की तह में छुपा कर उलझनें
मुश्किलें अपनी ऐसे आसान कर लेती हूं
पहले उलझती थी बात- बात पर
अब ख़ामोशी से हार मान लेती हूं😊
Asa layian ne tere utte aasa😊
De tu khud nu na de koi dilasa❤️
Ke vatti na tu paasa sajjna🙏..!!
ਅਸਾਂ ਲਾਈਆਂ ਨੇ ਤੇਰੇ ਉੱਤੇ ਆਸਾਂ😊
ਦੇ ਤੂੰ ਖੁਦ ਨੂੰ ਨਾ ਦੇ ਕੋਈ ਦਿਲਾਸਾ❤️
ਕਿ ਵੱਟੀ ਨਾ ਤੂੰ ਪਾਸਾ ਸੱਜਣਾ🙏..!!