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अब तो आन पड़ी है || akbar story

अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-

“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”

सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।

बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,

“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”

उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”

सेठों के मुखिया ने कहा-

“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”

बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।

Title: अब तो आन पड़ी है || akbar story

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हाँ प्यार करता हूँ ना मैं !!! Hindi poetry

हाँ प्यार करता हूँ ना मैं !!!
नैनन नसीली पलकें हो झुकी,
उन मेें आंखें मिलीं झील,
तितली सी मड़ाती बर्न,
आँखों में दिन रात सीधती पलकें, 
हाँ प्यार करता हूँ ना मैं!!!
लबों में शामिल हो गई मुस्कान, मुस्कान
उन लोगों से मिलने में गुलाब सी चाहत,
ओ चाहत में थी रोशनी सी मोहब्बत,
प्यार के पार तो बस एक विश्वास था,
हाँ प्यार करता हूँ ना मैं!!!
पासपोर्ट में लड़खाती हों बाली,
बालीं से झड़ती यें फिजायें,
फिजो से मिली घटायें,
हाँ प्यार करता हूँ ना मैं!!!
हाँ प्यार करता हूँ ना मैं
बालें लटकती हो वट सी लट,
वो लटों में शामिल हों लेस,
उन मामलों को घटकी हमेशा वो पट्टी,
जिसमें सदा बालें रहती हैं लिपटी,
हाँ प्यार करता हूँ ना मैं!!!
हाँ प्यार करता हूँ ना मैं
कुतुम्ब सी माथे मे हैं मून की लाकेट,
उस लाकेट में थी हमारी मन्ते,
ये मन्ते आया था नज्मों की नगरीयों से,
वो हर नगरी थी दस दिशाओं पे, 
हाँ प्यार करता हूँ ना मैं!!!



Dil pave sohne da hove lokh fir vi jisma te marde neh

Jagg che haseen chehre lakhan firde neh
Hussan dekh k lokki pyaar karde neh
Sirat nu nirana karde neh
Pawe dil aur dimaag sohne da hove lokki fer vi jisma teh marde neh

Title: Dil pave sohne da hove lokh fir vi jisma te marde neh