दाल हो या दिल हो सब में मिलावट हैमोहब्बत के बाज़ार में भारी गिरावट हैअमीरों के सारे काम होते फटाफट हैगरीबों के काम में आती अक्सर रुकावट है
दाल हो या दिल हो सब में मिलावट हैमोहब्बत के बाज़ार में भारी गिरावट हैअमीरों के सारे काम होते फटाफट हैगरीबों के काम में आती अक्सर रुकावट है
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
बस आज़ की रात है
जी भरकर देख लो
यह आख़िरी मुलाक़ात है
जी भरकर देख लो
तुम्हारा शहर तो रास्ते में आ गया था
हमें तो किसी और मंज़िल की आस है
जी भरकर देख लो
अच्छा है तुमने हमारी कदर नहीं की
तुम वो जौहरी हो जिसे कौड़ियों की तलाश है
जी भरकर देख लो
मुझे कुछ भी कहना आसान था न
अब कुदरत की लाठी बेआवाज़ है
जी भरकर देख लो!!!