आँखों में जलन और सीने में गुबार है
झूठ की धुन्ध में दिखना बंद हो गया है
आदत हो गई है घुट-घुट कर मरने की
हवाओं में इतना ज़हर जो घुल गया है
Enjoy Every Movement of life!
आँखों में जलन और सीने में गुबार है
झूठ की धुन्ध में दिखना बंद हो गया है
आदत हो गई है घुट-घुट कर मरने की
हवाओं में इतना ज़हर जो घुल गया है
कोई खुशियों की चाह में रोया,
कोई दुखों की पनाह में रोया,
अजीब सिलसिला हैं ये “ज़िंदगी” का..
कोई भरोसे के लिए रोया,
कोई भरोसा कर के रोया!! ??
Koi khusiyo ki chah main roya,
Koi dukhon ki panah main roya,
Ajeeb silsila hai ye zindagi ka,
Koi bharose ke liye roya,
Toh koi bharosa karke roya. ??
