वो जानती थी फिर भी दीखाया उसने
हाथ उसका किसे और के हाथ में थमाया उसने
और हमने कहा था हमारे जितना नही कर पाओगी
हमसे ज्यादा किसे और से ईश्क करके दिखाया उसने
वो जानती थी फिर भी दीखाया उसने
हाथ उसका किसे और के हाथ में थमाया उसने
और हमने कहा था हमारे जितना नही कर पाओगी
हमसे ज्यादा किसे और से ईश्क करके दिखाया उसने
उसकी वो मासूम सी आंखें, कभी-कभी मुझे झूठी सी लगती हैं..
उसकी वो सोच कर बनाई हुई बातें, अक्सर मुझे टूटी सी लगती हैं..
कभी मेरी नाराज़गी पर मुस्कुराती है, कभी प्यार पर रूठी सी लगती है..
कभी उसकी मामूली से हरकत भी मुझे, अनूठी सी लगती है..
कभी उसकी झुकी पलकों में इश्क होता है, कभी उठी सी लगती हैं..
उसके प्यार पर शक नहीं मुझे, फिर भी ना जाने क्यूं, झूठी सी लगती है..
heart rated 💔
