इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
Dheere dheere raat ho rhi hai
Aankho mein yaado ki barsat ho rhi hai
Dil kehta hai ki tum pass ho
Frr bhi milne ki aas ho rhi hai..
धीरे धीरे रात हो रही है
आंखों में यादों की बरसात हो रही है
दिल कहता है कि तुम पास हो
फिर भी मिलने की आस हो रही है..
Tu chhd ke gayi hai,
Kitno ki luti sham hai.
Jane kitno ke dil tode hai,
Tera yhi to ek Kaam hai.
Kehti thi kamyab na hoga kabhi;
Mere ishq ka imtihan lete the sabhi.
Arey ek dafa Nazar ghumake dekh meri jaan,
Ab to shayaro ki mehfil m bhi mera Naam hai….
–Hiral Singh