इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
वो हुज़रा हमको,मक़ान से प्यारा है
उसका इश्क़ हमे, ज़ान से प्यारा है
नफ़रत करता है,अफताफ अंधेरे से
जुगनू को अंधेरा,ज़हान से प्यारा है
तुम्हारे मुंह से,ये अच्छा नहीं लगता
उसका नाम,मेरी ज़ुबान से प्यारा है
वाकी सारे है, इन सितारों की तरह
बस वो एक चेहरा, चांद से प्यारा है
सब काट के,एक लकीर उसकी बना
वो नफा,हज़ार नुकसान से प्यारा है
घूम लो जाकर, हज़ारों देश विदेश
कोई नहीं,जो हिंदुस्तान से प्यारा है
kujh likhe sirnaawe paateya te, kujh chitthiya sanbh ke
le ke baith jaana bukal ‘ch teri tang de
vich teri taang de
ਕੁਝ ਲਿਖੇ ਸਿਰਨਾਵੇਂ ਪੱਤਿਆਂ ਤੇ, ਕੁਝ ਚਿੱਠੀਆਂ ਸਾਂਭ ਕੇ
ਲੈ ਕੇ ਬੈਠ ਜਾਨਾ ਬੁੱਕਲ’ਚ ਵਿਚ ਤੇਰੀ ਤਾਂਗ ਦੇ
ਵਿੱਚ ਤੇਰੀ ਤਾਂਗ ਦੇ