इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
Yeh raat bahut…,
gehri neend mai dale..
Ki na aaye uski yaad…
Hume khudkushi se bacha le…
यह रात बहुत…
गहरी नींद में ढले..
कि न आए उसकी याद…
हमें खुदकुशी से बचा ले…
ohnu yaad karna me chhad dita
dil mera eh kehnda rehnda
par fir v
shayari ohde te eh likhda rehnda
ਉਹਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਨਾ ਮੇ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ
ਦਿਲ ਮੇਰਾ ਇਹ ਕਹਿੰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ
ਪਰ ਫਿਰ ਵੀ
ਸ਼ਾਇਰੀ ਉਹਦੇ ਤੇ ਏ ਲਿਖਦਾ ਰਹਿੰਦਾ