इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
चंद्रयान-3 का सफर फिर से आरंभ हुआ, चांद की ओर हमारा प्यार फिर से बढ़ा।
जवानी बिताई चंद्रयान-2 में, अब नए सपनों के साथ हम आएंगे।
चांद पर तिरंगा लहराएँगे हम गर्व से, सितारों की ओर हम फिर से निकलेंगे।
इस नए यात्रा में हमारी मंजिल हो चांद, चंद्रयान-3 के संग हम सभी लहराएंगे झंड।
अपने तय करे हम नये इतिहास की प्रारंभ, चंद की खोज में हम सभी हैं महिमा के सभी रूप।
चंद्रयान-3 हमारी शान है, गर्व है हमें, इस यात्रा में हम सभी बढ़ेंगे और जीतेंगे।