इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
Tenu chubde mere lafz ne eh pta e menu..!!
Taan hi chup rehnde haan
Ke mera bhuta bolna pasand nahi tenu..!!
ਤੈਨੂੰ ਚੁੱਭਦੇ ਮੇਰੇ ਲਫ਼ਜ਼ ਨੇ ਇਹ ਪਤਾ ਏ ਮੈਨੂੰ ..!!
ਤਾਂ ਹੀ ਚੁੱਪ ਰਹਿੰਦੇ ਹਾਂ
ਕਿ ਮੇਰਾ ਬਹੁਤਾ ਬੋਲਣਾ ਪਸੰਦ ਨਹੀਂ ਤੈਨੂੰ..!!
सबर की ये जिंदगी जाने केबी मुक्क्मल फल दिलाएगी
खाक हुये खवाबों पर कब नई कली आएगी ,
मसरूफ़ रहे हम सदा किताबों मे
क्या पता था जिंदगी का अशली सबक तो ठोकर शिखएगी ।
जो नोका जा रही ह दरीया के साथ
वो क्या ही वापिस किनारा दिखाएगी
अगर यू ही चलती रही खोवाबों की हकीकत से जंग
तो यकीनन जल्दी ही इंतकाल की खबर आएगी ।