इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
ये और बात है, के उसने भुला दिया हमें
हमसे उसे आज तक, भुलाया नहीं गया।।
आंसू ना बहाए उसने, तो ये जान लीजिए
इश्क में उसे कभी, आजमाया नहीं गया।।
चाहते तो हम भी, मिल जाता बोहोत कुछ
हमसे ही ये सर कभी झुकाया नहीं गया।।
इश्क के सफ़र में, बोहोत दर्द है, थकन है
जाने क्यूं हमें ये , बताया नहीं गया।।
Hamsafar bahut ne par koi v jachda nahi
tere siwa koi chehra dil vich vasda nahi
ਹਮਸਫ਼ਰ ਬਹੁਤ ਨੇ ਪਰ ਕੋਈ ਵੀ ਜਚਦਾ ਨਹੀਂ ,
ਤੇਰੇ ਸਿਵਾ ਕੋਈ ਚੇਹਰਾ ਦਿਲ ਵਿਚ ਵਸਦਾ ਨਹੀ 😊