इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
kade iko painda c, ajh raah ho gaye ne vakh
tu bhul gya sajna
me teriyaan yaadan vich ho gya kakh
ਕਦੇ ਇਕੋ ਪੈਂਡਾ ਸੀ, ਅੱਜ ਰਾਹ ਹੋ ਗਏ ਨੇ ਵੱਖ
ਤੂੰ ਭੁੱਲ ਗਿਆ ਸੱਜਣਾ
ਤੇ ਮੈਂ ਤੇਰੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਵਿੱਚ ਹੋ ਗਿਆ ਕੱਖ
जो खो गया है क्या कभी वापिस आएगा
दिल भटक रहा है उसकी तैलाश मे , क्या वो मिला जाएगा
न सोचा था कभी साथ रहने की कसमे खा के
वो यू अकेला ही चला जाएगा
जो खो गया है क्या कभी वापिस आएगा ?
न सोचा ज़िंदगी को रंगीन कर , अचानक यू बेरंग कर जाएगा
खवाब दिये थे जो उसने वो अधूरे ही छड़ जाएगा
जो खो गया है क्या कभी वापिस आएगा ?
….