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इस छोटी सी ज़िंदगी के कुछ कटु अनुभव✌️ || zindagi shayari hindi

हादसे इन आँखों ने तमाम देखे है
जिनको हम प्यार से पा न सके
होते वो लोग निलाम देखे है
अश्क नही लहु छलकता है आँखों से
बर्बादियों के जश्न में झलकते जाम देखे है
मैंने ऐसे भी मुकाम देखे है
दोस्तों में शामिल दुश्मनो के नाम देखें है
यकीन सबसे तब उठ गया
जब सच्चे दिल वालों के होते बुरे अंजाम देखे है
ज़ख्म गम,दर्द सच्चाई को मिलते इनाम देखे हैं
झूठों की शान में होते सलाम देखे है
छोड दिया खुद को मजबूत कहना
गिरते यहां बहुत बलवान देखे हैं
अकेले रहना बेहतर है अब✌️
सबसे मिलने के नुक्सान देखे हैं
कोई नहीं रहता यहाँ देर तक
गिरते मैंने वो मजबूत मकान देखे हैं
रोशनी में जो दूर तक साथ रहे
अंधेरे में दूर होते वो इंसान देखे हैं
कोई एक तो नहीं है दर्द की वजाह
वे दर्द इंसान मैंने तमाम देखे हैं
खुशी में तो सब साथ ही थे
बस गम में रास्ते सुनसान देखे हैं
हर बात में जान जान कहने वाले
लेते मैंने जान देखे हैं
एक नही हादसे तमाम देखे है!!
Manisha❤️Mann✍️

Title: इस छोटी सी ज़िंदगी के कुछ कटु अनुभव✌️ || zindagi shayari hindi

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


English Quotes || MOTIVATION

“Motivational English Quotes”

. “A fruitful man is one who can establish a firm framework with the blocks others have thrown at him.”

“Nobody can cause you to feel inferior without your assent.”

Title: English Quotes || MOTIVATION


Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry

थी मै,शांत चित्त बहती नदी – सी
तलहटी में था कुछ जमा हुआ
कुछ बर्फ – सा ,कुछ पत्थर – सा।
शायद कुछ मरा हुआ..
कुछ अधमरा सा।
छोड़ दिया था मैंने
हर आशा व निराशा।
होंठो में मुस्कान लिए
जीवन के जंग में उलझी
कभी सुलगी,कभी सुलझी..
बस बहना सीख लिया था मैंने।
जो लगी थी चोट कभी
जो टूटा था हृदय कभी
उन दरारों को सबसे छुपा लिया था
कर्तव्यों की आड़ में।
फिर एक दिन..
हवा के झोंके के संग
ना जाने कहीं से आया
एक मनभावन चंचल तितली
था वो जरा प्यासा सा
मनमोहक प्यारा सा।
खुशबूओं और पुष्पों
की दुनिया छोड़
सारी असमानताओं और
बंधनों को तोड़
सहमी – बहती नदी को
खुलकर बहना सीखा गया,
अपने प्रेम की गरमी से
बर्फ क्या पत्थर भी पिघला गया।
पाकर विश्वास कोमल भावों से जोड़े नाते का
सारी दबी अपेक्षाएं हो गई फिर जीवंत
लेकिन क्या पता था –
होगा इसका भी एक दिन अंत !
तितली को आयी अपनों की याद
मुड़ चला बगिया की ओर
सह ना सकी ये देख नदी
ये बिछड़न ये एकाकीपन
रोयी , गिड़गिड़ाई ..की मिन्नतें
दर्द दुबारा ये सह न पाऊंगी
सिसक सिसक कर उसे बतलाई।
नहीं सुनना था उसे,
नहीं सुन पाया वो।
नहीं रुकना था उसे,
नहीं रुक पाया वो।
तेज उफान आया नदी में,
क्रोध और अवसाद
छाया मन में,
फिर छला था
नेह जता कर किसी ने।
आवाज देती..लहरें,
उठती और गिरती
किनारों से टकराती,
हो गई घायल।
बीत गए असंख्य क्षण
उसकी वापसी की आस में
लेकिन सामने था, तो सिर्फ शून्य।
हो गई नदी फिर से मौन..
छा गई निरवता।
लेकिन अबकी बार,
नहीं जमा कुछ तलहटी में
कुछ बर्फ सा,
कुछ पत्थर सा।
बस रह गया भीतर
रक्तिम हृदय..
और लाल रक्त।
जो रिस रिस कर
घुलता जा रहा है
मिलता जा रहा है
अपने ही बेरंग पानी में…।।

Title: Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry