और फिर कब तक वहा रहता मैं
और कब तक कुछ ना कहता मै
फिर मैने वो बोल ही दिया
कब तक यू चुप चाप रहता मैं
और फिर मरना ही मुनासिब समझा हमने
आखिर के तक ये सब सहता मैं
और फिर कब तक वहा रहता मैं
और कब तक कुछ ना कहता मै
फिर मैने वो बोल ही दिया
कब तक यू चुप चाप रहता मैं
और फिर मरना ही मुनासिब समझा हमने
आखिर के तक ये सब सहता मैं
ਏਹ ਰੋਣਾ ਉਮਰਾਂ ਦਾ ਪੇਆ ਹੈ
ਤੇਰੇ ਖਯਾਲਾ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਹੂਣ ਦਸ ਕੀ ਰੇਹਾ ਹੈ
ਤੇਰੇਆਂ ਖ਼ਤਾਂ ਨੇ ਬੰਦ ਕਰਤੀ ਗੱਲਾਂ ਦਸਣੀ ਤੇਰੀ
ਪਿਆਰ ਦੇ ਨਾਲ ਕਲਮਾਂ ਤੇਰਿਆਂ ਦਾ ਰੰਗ ਫ਼ਿਕਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ
ਏਹ ਵੇਖੋ ਇਸ਼ਕ ਦੀ ਸੱਟ ਨੂੰ
ਸਭਨੂੰ ਹਸੋਣ ਵਾਲਾਂ ਆਜ ਰੋ ਰਿਹਾ ਹੈ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,
फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,
एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी
हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।