तेरे घर का पता मालूम है
पर हम वहा कभी नही जाते है
तेरी याद जब भी बोहोत ज्यादा आए
तेरे गांव से तेरी खुशबू ले आते है
तेरे घर का पता मालूम है
पर हम वहा कभी नही जाते है
तेरी याद जब भी बोहोत ज्यादा आए
तेरे गांव से तेरी खुशबू ले आते है
Zindagi se bdi saja hi nahi
Aur kya jurm hai pta hi nahi
Itne hisso me bat gya hu mai
Mere hisse me kuchh bacha hi nahi💔
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नही
और क्या जुर्म है पता ही नही
इतने हिस्सो में बट गया हूं मैं
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नही💔
एक रात जब दरवाजे पर दस्तक हुई, तो लगा कोई आया होगा..
आख़िर देर रात ये है कौन। कहीं कोई बुरी खबर तो ना लाया होगा..?
बिस्तर से उठा घबराहट के साथ, रात ताला भी तो लगाया होगा..
चाबी ना जाने कहां रख दी मैंने, ऐसा होगा, रात दिमाग में ना आया होगा..
चाबी लेकर दौड़ा दरवाजे की ओर, दरवाजा तो खोलू, शायद कोई घबराया होगा..
दरवाज़ा खोला कोई नहीं था, ये कोई मज़ाक का वक़्त है, जो दरवाज़ा खटखटाया
होगा..
ना जाने कौन था ये, जो इतनी रात गऐ मेरे दर पे आया होगा..?
पूरी रात निकल गई सोचने में, ये मेरा वहम था, या सच में कोई आया होगा..