तेरे घर का पता मालूम है
पर हम वहा कभी नही जाते है
तेरी याद जब भी बोहोत ज्यादा आए
तेरे गांव से तेरी खुशबू ले आते है
Enjoy Every Movement of life!
तेरे घर का पता मालूम है
पर हम वहा कभी नही जाते है
तेरी याद जब भी बोहोत ज्यादा आए
तेरे गांव से तेरी खुशबू ले आते है

तेरी हंसी मुरझाऐ फुलों को भी फिर से खिला दे,
जब झपकाऐ तु पलकें तो ,सुरज को भी ग्रहण लगा दे,
चाल तेरी ऐसी जैसे लहराती हो पीपल की डाल कोई,
और जब खुली हों तेरी जुल्फें तो काली घटा झा जाऐ!
बोल तेरे ऐसे जैसे जलेबी से चासनी टपक जाऐ,
क्या लिखुं तेरी खुबसुरती को तु है गणित का सवाल कोई!