तेरे घर का पता मालूम है
पर हम वहा कभी नही जाते है
तेरी याद जब भी बोहोत ज्यादा आए
तेरे गांव से तेरी खुशबू ले आते है
तेरे घर का पता मालूम है
पर हम वहा कभी नही जाते है
तेरी याद जब भी बोहोत ज्यादा आए
तेरे गांव से तेरी खुशबू ले आते है
कब्र दर कब्र इक इश्तिहार जा रहा है,
अपना था कोई वो जो दूर जा रहा है,
मोहब्बत सही, इश्क सही, पास नहीं है अब,
जोगी इसी धुन में कोई गीत गा रहा है...
जो अपने थे वो चले गए....
हर वक्त आंसू पोंछने कोई पास आ रहा है,
मालूम है वो भी चला जायेगा फिर आंसू देकर,
जोगी इसी धुन में कोई गीत गा रहा है...
मतलबी, बेशर्म, बेईमान है दुनिया सारी
मालूम है की जीने नहीं देगी... देखो...
मेरी कब्र से भी मेरा इश्तिहार आ रहा है...
जोगी इसी धुन में कोई गीत गा रहा है...
choom kar kafan mein lipaten mere chehare ko.. usane tadap ke kaha,
naye kapade kya pahan lie… hamen dekhate bhi nahin..
चूम कर कफ़न में लिपटें मेरे चेहरे को.. उसने तड़प के कहा,
नए कपड़े क्या पहन लिए… हमें देखते भी नहीं..