तेरे घर का पता मालूम है
पर हम वहा कभी नही जाते है
तेरी याद जब भी बोहोत ज्यादा आए
तेरे गांव से तेरी खुशबू ले आते है
Enjoy Every Movement of life!
तेरे घर का पता मालूम है
पर हम वहा कभी नही जाते है
तेरी याद जब भी बोहोत ज्यादा आए
तेरे गांव से तेरी खुशबू ले आते है
Unki samaj hamari samaj ko kabhi samaj hi naa payi vo is kadar nasamjh huye ki hamari paak mohabbat unhe na bhayi
उनकी समझ हमारी समझ को कभी समझ ही न पाई वो इस कदर नासमझ हुए कि हमारी पाक मोहब्बत उन्हें न भाई
Sahara na raha koi mera
Yuhi darbadar bhatakta hu
Jinki aankho ka noor tha mai kbhi
Ab unhi nazro me roz khatakta hu… 🍂
सहारा ना रहा कोई मेरा
यूँही दरबदर भटकता हूँ
जिनकी आँखों का नूर था मैं कभी
अब उन्हीं नज़रों मे रोज़ खटकता हूँ।। 🍂