मै ता उम्र इस गम के साथ रह गया
तुझे दिल की बात नही बताई
मै दोस्ती बचाने में रह गया
और तू आंखे नही पढ़ पाई
मै ता उम्र इस गम के साथ रह गया
तुझे दिल की बात नही बताई
मै दोस्ती बचाने में रह गया
और तू आंखे नही पढ़ पाई
किसी को रफ्ता-रफ्ता चाहा था , अब किश्तों में मरते हैं ।
कैसे कहें अपना हाल-ए-दिल , क्या बताएँ कि हम मोहब्बत करते हैं ।।
ईश्क की सौदेबाजी में , नीलाम हो गई चाहते मेरी ।
नफा-नुकसान के फासलों में , उम्मीद की गुंजाइश ढूँढा करते हैं ।।
ख्वाबों के शहर में , चाहत का एक ख्याल आया ।
कई जवाबों के बाद , संगीन एक सवाल आया ।।
रूखसत किया जिसे , जिसकी पसंद से हमने ।
वो जो शख्स था , मेरी कई इबादतों के बाद आया ।।❤️🍂