मै ता उम्र इस गम के साथ रह गया
तुझे दिल की बात नही बताई
मै दोस्ती बचाने में रह गया
और तू आंखे नही पढ़ पाई
मै ता उम्र इस गम के साथ रह गया
तुझे दिल की बात नही बताई
मै दोस्ती बचाने में रह गया
और तू आंखे नही पढ़ पाई

मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने
ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैं ने
अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने
उन्हें अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है
कि कुछ मुद्दत हसीं ख़्वाबों में खो कर जी लिया मैं ने
बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो
बहुत दुख सह लिए मैं ने बहुत दिन जी लिया मैं ने