कितनी प्यारी बाते करती थी
जब वो हमारी बाते करती थी
वक्त लगा उसे खुलने में पर
फिर वो बाते सारी करती थी
और दिन बन जाता था हमारा
जब वो मीठी सी प्यारी करती थी
कितनी प्यारी बाते करती थी
जब वो हमारी बाते करती थी
वक्त लगा उसे खुलने में पर
फिर वो बाते सारी करती थी
और दिन बन जाता था हमारा
जब वो मीठी सी प्यारी करती थी
जो लोग हमे पागल कहते थे
उनका कहना अब ठीक लगता हैं
तेरे इश्क में रहेगें ता उम्र अब
चाहे कितना भी अजीब लगता हैं
तेरे मर्जी हैं आ या नही
हम अब ऐसे ही जियेगे
हमे यही सलीका अब ठीक लगता हैं
रात को रात, सुबह को सुबह लिखते हो
अच्छे को अच्छा बुरे को,बुरा लिखते हो
तुम्हें तो आदत है,दर्द को दर्द लिखने की
मतलब हम से बिल्कुल,जुदा लिखते हो
खुदा को तो, कभी लिखा ही नहीं तुमने
पत्थर को बना के मूरत,खुदा लिखते हो
तुम तो दुश्मनी में भी, करते हो व्यापार
बनकर हक़िम,ज़हर की दवा लिखते हो
बो तो लिख देता है,बेवफ़ाई को मज़बूरी
भैरव क्यूं बेवफ़ा को, बेवफ़ा लिखते हो