उसने जैसे जैसे कहा, हम करते चले गए,
उसने जहां जहां कहा, हम चलते चले गए,
हमने तो अपनी सांसों की डोर भी उसके हाथों में दे रखी थी,
उसने जैसे जैसे छोड़ा, हम मरते चले गए.
उसने जैसे जैसे कहा, हम करते चले गए,
उसने जहां जहां कहा, हम चलते चले गए,
हमने तो अपनी सांसों की डोर भी उसके हाथों में दे रखी थी,
उसने जैसे जैसे छोड़ा, हम मरते चले गए.
आसमां छूने की ख्वाहिश किसकी नहीं होती,
बस फर्क इतना है, हर किसी की पूरी नहीं होती,
पूरी होती है उनकी, जो पसीने की बूंदे नही गिनते ,
अब दुआओं में मेहनत जितनी बरकत कहां होती,
किसने कहा दुआओं से सब हासिल हो जाता है,
ऐसा कुछ होता तो आज किसी की हसरतें बाकी ना होती,
मसला हसरतों का है इसीलिए मेहनत की तालीम सीखी है,
कुछ तो कमी है खुदा मेरे, जो दुआएं आज थोड़ी फीकी है...
