*गुजर रही है ये जिंदगी बड़े ही नाज़ुक दौर से ..*
*मिलती नहीं तसल्ली तेरे सिवा किसी और से..*
Enjoy Every Movement of life!
*गुजर रही है ये जिंदगी बड़े ही नाज़ुक दौर से ..*
*मिलती नहीं तसल्ली तेरे सिवा किसी और से..*
मत पूछ शीशे से उसके टूटने की वजह,
उसने भी मेरी तरह किसी पत्थर को अपना समजा होगा….
mat poochh sheeshe se usake tootane kee vajah,
usane bhee meree tarah kisee patthar ko apana samaja hoga….
