*गुजर रही है ये जिंदगी बड़े ही नाज़ुक दौर से ..*
*मिलती नहीं तसल्ली तेरे सिवा किसी और से..*
*गुजर रही है ये जिंदगी बड़े ही नाज़ुक दौर से ..*
*मिलती नहीं तसल्ली तेरे सिवा किसी और से..*
हाथ थाम कर भी तेरा सहारा न मिला
में वो लहर हूँ जिसे किनारा न मिला
मिल गया मुझे जो कुछ भी चाहा मैंने
मिला नहीं तो सिर्फ साथ तुम्हारा न मिला
वैसे तो सितारों से भरा हुआ है आसमान मिला
मगर जो हम ढूंढ़ रहे थे वो सितारा न मिला
कुछ इस तरह से बदली पहर ज़िन्दगी की हमारी
फिर जिसको भी पुकारा वो दुबारा न मिला
एहसास तो हुआ उसे मगर देर बहुत हो गयी
उसने जब ढूँढा तो निशान भी हमारा न मिला🍂