उनके बारे में सोचूं, तो सोच में सुबह से शाम करदूँ..
मेरी दोस्ती कुबूल है उन्हें, क्या ये ज़िक्र शरेआम करदूँ..
अभी कहदूँ या रुकुं थोडा, जो मेरे दिल में बातें हैं..?
मेरा बस चले तो अपनी मुस्कान का कुछ हिस्सा, मैं उनके नाम करदूँ..
Enjoy Every Movement of life!
उनके बारे में सोचूं, तो सोच में सुबह से शाम करदूँ..
मेरी दोस्ती कुबूल है उन्हें, क्या ये ज़िक्र शरेआम करदूँ..
अभी कहदूँ या रुकुं थोडा, जो मेरे दिल में बातें हैं..?
मेरा बस चले तो अपनी मुस्कान का कुछ हिस्सा, मैं उनके नाम करदूँ..
Likhu…
Toh “lafz” tum ho …
Sochu….
Toh “khayaal” tum ho…
Maangu….
Toh “dua” tum ho…
Sach kahu..
Toh “mohobbat” tum ho…. 😘🥰🥰
लिखूँ…
तो “लफ्ज़” तुम हो…
सोचूँ…
तो “खयाल” तुम हो…
माँगू…
तो “दुआ” तुम हो…
सच कहूँ…
तो “मोहोब्बत” तुम हो…😘🥰🥰
