उनके बारे में सोचूं, तो सोच में सुबह से शाम करदूँ..
मेरी दोस्ती कुबूल है उन्हें, क्या ये ज़िक्र शरेआम करदूँ..
अभी कहदूँ या रुकुं थोडा, जो मेरे दिल में बातें हैं..?
मेरा बस चले तो अपनी मुस्कान का कुछ हिस्सा, मैं उनके नाम करदूँ..
उनके बारे में सोचूं, तो सोच में सुबह से शाम करदूँ..
मेरी दोस्ती कुबूल है उन्हें, क्या ये ज़िक्र शरेआम करदूँ..
अभी कहदूँ या रुकुं थोडा, जो मेरे दिल में बातें हैं..?
मेरा बस चले तो अपनी मुस्कान का कुछ हिस्सा, मैं उनके नाम करदूँ..
एक बचपन का जमाना था
जहाँ खुशियों का खजाना था
चाहत चांद को पाने कि थी
पर दिल तितली का दिवाना था
ना खबर अपनी थी
ना शाम का ठिकाना था
माँ की कहानी थी
परियों का फसाना था
क्यो हो गए आज हम इतने बड़े
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था❤️
ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਇਨਸਾਨ ਦੇਖੇ ਨੇਂ
ਜਿਹਨਾਂ ਦੇ ਜਿਸਮ ਤੇ ਲਿਬਾਸ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ
ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲਿਬਾਸ ਦੇਖੇ ਨੇਂ
ਜਿਹਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਇਨਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ
ਕੋਈ ਹਾਲਾਤ ਨਹੀਂ ਸਮਝਦਾ
ਕੋਈ ਜਜਬਾਤ ਨਹੀਂ ਸਮਝਦਾ
ਇਹ ਤਾਂ ਆਪਣੀ ਆਪਣੀ ਸਮਝ ਹੈ
ਕੋਈ ਕੋਰਾ ਕਾਗਜ਼ ਵੀ ਪੜ ਲੈਂਦਾ ਹੈ
ਕੋਈ ਪੂਰੀ ਕਿਤਾਬ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸਮਝਦਾ।।