Skip to content

यार पुराना था। || Hindi shayari

हमने डूबते सूरज की एक शाम को अपना किरदार बदल डाला,
के उस मोहब्बत की चुभन को शायरी का नजमा दे डाला,
लोग मेरी तकरीरों पर वाह वाही दे रहे थे,
भीड़ में कुछ लोग ताली बजाकर, तो कुछ लोग अपनी नाकाम मोहब्बत की दलील दे रहे थे।
महफिल के शोर से एक जानी पहचानी सी आवाज आई,
तू आज भी आगे नहीं बढ़ा की उसने गुहार लगाई,
उसकी इस शिकायत में परवान था पुराने यारो का ।
मै हैरान था कौन था यह शक्स
अनजानों की भीड़ में जिसने मेरे शब्दो में छुपी नाकाम मोहब्बत को पहचाना था,
मुस्कुराता हुआ सामने आया तब समझ आया अरे यह तो यार पुराना था।

Title: यार पुराना था। || Hindi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Umar guzar di bewafa ke || bewafa HIndi story

उम्र सारी गुजर दी बेवफा प्यार में , रातों की नीद कुर्बान कर दी बेवफा प्यार में , हमने की थी मोहब्बत उम्र भर के सुकून के लिए,हालत कुछ यू बदले मेरे अब लगता है क्यूं गुजर दी हमने उम्र बेवफा प्यार में , अब हाल ऐसा है मेरा दिल में दर्द , आखों में आशू हाथ में ग्लास शराब का, जब बढ़ जाता है दिल में आलम तनाहियो का हाथों में होती है ग्लास शराब की, महफिलों में जब उठती है बेफायी की बाते उन बातो में जिक्र तेरी बेवफाई का होता जरूर है , कहते है सब की बांदा तो था काम का कर दिया खराब इश्क ने , क्यू गुजर दी हमने उम्र बेवफा प्यार में ।
सबने रोका था की मत करना ये दोस्त तू मोहब्बत यह मिलती वफा के बदले बेवफाई हमने न मानी बात किसी की करली मोहब्बत तुझ सनम हरजाई से , क्यू गुजर दी हमने उम्र बेवफा प्यार में । गम के सिवा कुछ न मिला ये दोस्त तेरी मोहब्बत में , अब रही नही हिम्मत अब और गम सहने की कर रहे कुर्बा खुद को बेवफा प्यार में , जब जनाजा निकले गा तेरी गली से मेरे महबूब आखों में आशू तेरे होगा जरूर , क्यू कर दी बेवफाई सोचे गी जरूर, जब भी तू सोएगी किसी गैर की बाहों में क्यूं की बेवफाई सोचे गी जरूर , मेरे मरने के बाद सब की जुबा पे होगा मेरा नाम हर जगह चर्चा होगा तेरी बेवफाई का कैसे एक आशिक ने उम्र गुजर दी बेवफा प्यार में ।

Title: Umar guzar di bewafa ke || bewafa HIndi story


Kalleya kyu nahi rehn dinde || punjabi poetry

ਤਰਪਾਲ ਦੇ ਪਲੜੇ ਅਕਲਾਂ ਤੇ,
ਅੰਦਰ ਗਿਆਨ ਦਾ ਮੀਂਹ ਨਹੀ ਪੈਣ ਦਿੰਦੇ…

ਇਹ ਵਣ ਸੁਵੰਨੇ ਭਰਮ ਭੁਲੇਖੇ,
ਤੇਰਾ ਨਾਮ ਨਹੀ ਬਹਿ ਕੇ ਲੈਣ ਦਿੰਦੇ….

ਬਹੁਤਾਂ ਕਹਿ ਤੇਰੇ ਬਾਰੇ ਖੁਸ਼ ਨਹੀਂ ਮੈ,
ਪਰ ਜੋ ਕਹਿਣਾ, ਓਹ ਤੇਰੇ ਠੇਕੇਦਾਰ ਨਹੀ ਕਹਿਣ ਦਿੰਦੇ….

ਪੱਥਰ ਵਿਚ ਉੱਗਦੇ ਬੂਟੇ ਜੋ,
ਮੇਰੀ ਉਮੀਦ ਦਾ ਹੁਜਰਾ ਨਹੀ ਟਇਹਨ ਦਿੰਦੇ….

ਹਵਾ, ਪਾਣੀ, ਰੁੱਖ, ਮਿੱਟੀ ਤੇ ਸੋਚ,
ਯਾਰ ਤੁਸੀ ਮੈਨੂੰ ਕੱਲਿਆ ਕਿਉ ਨਹੀ ਰਹਿਣ ਦਿੰਦੇ….ਹਰਸ✍️

Title: Kalleya kyu nahi rehn dinde || punjabi poetry