*लखनऊ* की शाम थी, पर *तन्हा* थे हम ।
*मुमकिन* होता तुम मेरे होते तो *साथ* होते हम ।।
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Enjoy Every Movement of life!
*लखनऊ* की शाम थी, पर *तन्हा* थे हम ।
*मुमकिन* होता तुम मेरे होते तो *साथ* होते हम ।।
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जिंदगी हाथ पकड़ कर बैठी है
मोत खड़ी हैं झोली फैलाए
खुदा भी कहता होगा मार तोह दूं इसे में
पहले दुआ मॉ की इसकी रास्ते से तोह हट जाये
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
Yun fasle na badha marz aur ilaz ke bich
Mai kahi mar na jau kal aur aaj ke bich🍁
यूँ फ़ासले न बढ़ा मर्ज और इलाज के बीच
मैं कहीं मर न जाऊं कल और आज के बीच🍁