सादगी हमारी हमसे है,
हम क्यूं बदल जाएं हजारों का रुख़ देखकर...
बदलने वाले किसी के अपने नहीं होते,
वो तो यूं ही बदल जाते हैं
नजारों का रुख़ देखकर...
Enjoy Every Movement of life!
सादगी हमारी हमसे है,
हम क्यूं बदल जाएं हजारों का रुख़ देखकर...
बदलने वाले किसी के अपने नहीं होते,
वो तो यूं ही बदल जाते हैं
नजारों का रुख़ देखकर...
इश्क की बाते न करो हमसे,
इश्क का भी हाल बेहाल हो गया है !!
किसी ज़माने में हुआ करता था इश्क खुदा,
आज वोही इश्क कमीना, निक्कमा और कमबख्त हो गया है !!
phir kaheen se dard ke sikke milenge,
ye hathelee aaj phir khujala rahee hai..
फिर कहीं से दर्द के सिक्के मिलेंगे,
ये हथेली आज फिर खुजला रही है..