हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
Vo akasar pucha karte the humse kyu batoon ko byaan nhi karte javab agar dete to humari mohabbat par svaal uth jate
वो अक्सर पूछा करते थे हमसे क्यों बातों को बयां नही करते जवाब अगर देते तो हमारी मोहब्बत पर सवाल उठ जाते
एक लड़की से मैं बहुत प्यार करता हु ।
ऐसे मिलो तो बड़ी सख्त बनती है
पर दिल से बड़ी बच्ची है
दिन भर उलझी रहती है वो बात तक नहीं करती
पर जब वो बात कर अपने इश्क में और पागल कर देती है
फिर बोले जो जो वो मैं भी वो वो करता हु
एक लड़की से मैं भी बहुत प्यार करता हु ।
दिल की बाते अपनी बताती नही है
मोहब्बत अपनी जताती नही है
अपने ख्वाबों से है प्यार उसे
पर मेरी जगह किसी को बिठाती नही है
वो जब जब मुस्कुराती है
एक सुरूर सा छा जाता है
उस जैसा होगा कहां कोई
मैं उसकी हर बात से प्यार करता हूं
एक लड़की से मैं भी प्यार करता हूं।