हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
Mein hun nhi kehna ke menu tere naal pyar e
Gall sajjna kyunki teri samajh ton paar e..!!
ਮੈਂ ਹੁਣ ਨਹੀਂ ਕਹਿਣਾ ਕਿ ਮੈਨੂੰ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਪਿਆਰ ਏ
ਗੱਲ ਸੱਜਣਾ ਕਿਉਂਕਿ ਤੇਰੀ ਸਮਝ ਤੋਂ ਪਾਰ ਏ..!!