हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
Fir vahi dua vahi baat krte ho
Lgta h hmesha dusro se pyar krte ho
Bs itni si bat hai khafa mt hona
Pr dil dhukhane ki roj shuruaat krte ho💔
फिर वही दुआ वही बात करते हो
लगता है हमेशा दूसरों से प्यार करते हो
बस इतनी सी बात है खफा मत होना
पर दिल दुखाने की रोज शुरुआत करते हो💔
“ख़ामोशी से भरे लब ज़रूर हैं,
दर्द भी ज़हन में ज़रूर है,
लेकिन मुस्कुराना फ़ितरत हैं||”❤️