हम रोशनी में बैठकर,सारी रात लिखते हैं
उस नक़ाव में हमको,दो चिराग़ दिखते हैं
तुझको अंदाज़ा भी नहीं होगा,के मेरे बगैर
तेरे पास बैठे लोग,कितने ख़राब दिखते हैं
हम रोशनी में बैठकर,सारी रात लिखते हैं
उस नक़ाव में हमको,दो चिराग़ दिखते हैं
तुझको अंदाज़ा भी नहीं होगा,के मेरे बगैर
तेरे पास बैठे लोग,कितने ख़राब दिखते हैं
पैसा सब कुछ खरीद भी सकते है, खरीद नहीं भी सकते है।
जिनके पास पैसा है, उनका इंसानियत ही बताएगा के पैसा क्या कर सकते है।
……………………………………………………………………………………
जनम से पता नहीं चलता कौन पंडित और कौन मेहतर है।
इन्सान का ब्यबहार ही बताता है के वो समाज में किस स्तर पर है।
………………………………………………………………………………………
अंतिम वक्त सबका आता है, लेकिन समय कभी ख़तम नहीं होता।
ज़िन्दगी दो दिन का, लेकिन अमर विजेता।
………………………………………………………………………………………………
मेरा ज़िन्दगी का फिल्म में भी बॉक्स ऑफिस फैक्टर।
में एक्टर, किस्मत प्रोडूसर और समय डायरेक्टर।
……………………………………………………………………………………………..
कंक्रीट का जंगल में हम सब जानवर।
शेर कहाँ मिलेगा, हम सब सियार।
……………………………………………………………………………………………
फूलों के रंग छा गये है मन में, लहर की आवाज़ उठी है दिल में।
दिन में सूरज, रात में चंद्रमा, रोशन जिंदगी में।
…………………………………………………………………………………………….
भासा सब एक है, भावना में अंतर।
खून सबका लाल है, इंसानियत पत्थर।
…………………………………………………………………………………………………
प्यार खुद आता है, उसे बुलाना नहीं होता।
किस्मत में लिखा है समय का पता।
…………………………………………………………………………………………………
सुहाना मौसम में चैन का साँस।
प्यार का मतलब दोस्ती में बिस्वास।
…………………………………………………………………………………………..
सुभे अँधेरा, नींद में टाउन।
फिर से लॉकडाउन।
………………………………………………………………………………………….
वक्त का इंतज़ार में, होगी जीत।
धीर रहो, सुनो पल का गीत।
……………………………………………………………………………………………
लहर हवा की तरह चलती फिरती है।
बात वक्त की तरह उचित सिखाती है।
………………………………………………………………………………………..
ज्यादा सुनोगे तो रहोगे दुःखी।
कल की बात, गुजरा हुआ रात, सुनो दिल की, अपने में सुखी।
………………………………………………………………………………………
अगर दर्द नहीं होता तो आराम भी नहीं मिलता।
अगर झगड़ा नहीं होता तो प्यार भी खो जाता।
……………………………………………………………………………………..
मम्मी पापा अगर डांटते है, आशीर्वाद वो।
बीबी का डाँटना मतलब हालत बुरा, सब ख़तम जब डांटते है बच्चो।
………………………………………………………………………………………
घरवाले अच्छे हो तो पड़ोसी का जरुरत नहीं।
घरवाले बुरे हो तो अच्छे पड़ोसी भी होते नहीं सही।
…………………………………………………………………………………….
दोस्त कहां पर मिलेगा।
खुद के बारे में सोचता हुआ इंसान अब यह पूछेगा।
…………………………………………………………………………………….
सुख रोते है कबर में, शांति जलते है श्मशान में।
छुपाओ खुदको, किसी के साथ मिलो मत, संक्रमण सांस में।
……………………………………………………………………………………..
जिंदगी में बड़ा बनना है तो उतना ही चालाक बनो जितना ईमानदार हो।
नही तो दूसरे आके ले लेंगे तुम्हारा ज़मीन और खा जायेंगे तुम्हारा छाँव।
………………………………………………………………………………………….
जिंदगी में हम लोग खेलने आये है, यहाँ ट्रॉफी सब को नहीं मिलता।
सिर्फ खेल का मजा लो, हार जीत एक साथ रहता।
………………………………………………………………………………………….
खून की नदी बहती, मार का बदला मार।
नेतागिरी राजनीती छेड़ता है मोहब्बत और प्यार।
…………………………………………………………………………………………
जो क्राइम करते है, उनके दिमाग ख़राब है।
शादी करो या नहीं भी करो, हालत हमेशा बुरा है।
………………………………………………………………………………………
क्रिमिनल बनता नहीं, बनाया जाता है।
क्राइम का ठिकाना जेल और क्रिमिनल का पागलखाने ही गंतब्य होता है।
…………………………………………………………………………………………
कभी कभी दिमाग में ट्रैफिक जैम हो जाता।
बिगड़ा हुआ सिग्नल पकड़ता हालत को और वक्त ट्रैफिक पुलिस का काम करता।
………………………………………………………………………………………….
नियति समय का ही एक रूप।
वक्त का सही इस्तेमाल करो, उसका इंतज़ार में रहते हैं सिर्फ बेकूफ़।
जो बीत गई सो बात गई
जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई
जीवन में वह था एक कुसुम
थे उसपर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुवन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियाँ
मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ
जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई
जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठतें हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गई सो बात गई
मृदु मिटटी के हैं बने हुए
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन लेकर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फिर भी मदिरालय के अन्दर
मधु के घट हैं मधु प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
जो बीत गई सो बात गई