*लखनऊ* की शाम थी, पर *तन्हा* थे हम ।
*मुमकिन* होता तुम मेरे होते तो *साथ* होते हम ।।
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Enjoy Every Movement of life!
*लखनऊ* की शाम थी, पर *तन्हा* थे हम ।
*मुमकिन* होता तुम मेरे होते तो *साथ* होते हम ।।
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Liye baitha hu kalam hathon mein,
Sochkar ke likh du kahani apni ,
dikh jaate hai kore panne kitab ke,
yaad aa jaati hai zindagani apni.🙃🍂
लिए बैठा हूँ कलम हाथों में
सोचकर कि लिख दू कहानी अपनी
दिख जाते हैं कोरे पन्ने किताब के
याद आ जाती है ज़िंदगानी अपनी..🙃🍂
