*लखनऊ* की शाम थी, पर *तन्हा* थे हम ।
*मुमकिन* होता तुम मेरे होते तो *साथ* होते हम ।।
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Enjoy Every Movement of life!
*लखनऊ* की शाम थी, पर *तन्हा* थे हम ।
*मुमकिन* होता तुम मेरे होते तो *साथ* होते हम ।।
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हमने जो की थी मोहब्बत आज भी है
उनके ज़ुल्फ़ों की शाए की चाहत आज भी है
ये रात कटती है आज भी ख्याल में उनके
दीवानों सी वो मेरी हालत आज भी है
किसी औरकी तस्वीर को उठती नहीं
बेईमान आँखों में थोड़ी सी शराफ़त आज भी है
एक बार चाह कर चाहे दिल तोड़ दे वोह
दिल तोड़ के जाने की इज़ाज़त उसे आज भी है
हमने जो की थी मोहब्बत आज भी है
उनके ज़ुल्फ़ों की शाए की चाहत आज भी है
