हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
Haqeeqat kaho to unhe khuab lagta hai
Shikwa karo to unhe mazak lagta hai
Kitni shiddat se hum unhe yaad karte hain
Ek vo hain jinhe sabkuch mazak lagta hai…🫠
हकीकत कहो तो उन्हें ख्वाब लगता है,
शिकवा करो तो उन्हें मज़ाक लगता है,
कितनी शिद्दत से हम उन्हें याद करतें हैं,
एक वो हैं जिन्हें ये सबकुछ मजाक लगता है…🫠
Teri tasveer ton ajj tera haal puchea..
kiwe bhull gaya tusi saada pyaar puchea..
kde kehnda c tere bina nhio srna..
ajj sr gea kiwe eh swaal puchea