
saanu hizar tere na mareyaa

पाव उठाऊ तो हर कदम पे एक दरिया जकड़ लेता है
गिराकर मुझे हरबार हवाओं से मिलकर अकड़ लेता है,
छोड़ दूं मुठ्ठी भर सपने मैं बुजदिल नही,
मान जाए तन मेरा पर मेरा दिल नहीं,
हर मोड़ पर मुझे ऐसे ही सताएंगे,
गिराकर मुझे खुद मुस्कुराएंगे,
तुम्हारे लिए मैं पहला नहीं हूं,
सुनो,
बहुत हिम्मत है मुझमें मैं अकेला नहीं हूं...
आसमां छूने की ख्वाहिश किसकी नहीं होती,
बस फर्क इतना है, हर किसी की पूरी नहीं होती,
पूरी होती है उनकी, जो पसीने की बूंदे नही गिनते ,
अब दुआओं में मेहनत जितनी बरकत कहां होती,
किसने कहा दुआओं से सब हासिल हो जाता है,
ऐसा कुछ होता तो आज किसी की हसरतें बाकी ना होती,
मसला हसरतों का है इसीलिए मेहनत की तालीम सीखी है,
कुछ तो कमी है खुदा मेरे, जो दुआएं आज थोड़ी फीकी है...