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Hindi Two shayari || awesome 2 lines shayari

आम आदमी प्यार से पढ़ेंगे अगर सरल भाषा में लिखा है।

कठिन भाषा सिर्फ जनता को नहीं, बल्कि उनके सोच को भी घायल करते है।

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छोटा छोटा गलतियां अगर शुरू से रोका नहीं गया, तो एक दिन बड़ा अन्याय जन्म लेगा।

बच्चो को डांटना प्यार से, ज्यादा डांटोगे तब भी बुरा होगा।

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अपने इंसानियत को ढूंढ ते हुए इंसान थक गए।

कम से कम अपने दिल को तो पूछो, ज्यादा दिमाग न लगाए।

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मैं क्या हु और क्या नहीं हु, वो मुझे पाता नहीं।

मैं सिर्फ मैं हु, सूरज की तरह सही।   

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थोड़ा थोड़ा करके काम करो रोज़, एक दिन भी न बैठो, सफल होगे।

एकदिन में सब काम करके, पूरा महीने बैठे रहोगे, तो जरूर मरोगे।

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मादा हाथी अपनी बच्चा को खो के पागलपन करते है।

अपना मन भी उसकी तरह निर्बोध हैं।

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रोज़ रोज़ एक एक ईंट लाके गाँठना, एक दिन छूट न जाये।

एक साल के बाद देखना, अपना घर बन गए।

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बिलकुल शांत हो जायो, गुस्से में न रहो।

शांति लाता है समृद्धि और गुस्सा खा जाता है इंसान का छांव।

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ध्यान सबसे बड़ा व्यायाम है।

अगर मन सही है तो शरीर भी सही काम करता है।

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बात पत्नी की तरह- हसती है, रुलाती भी है।  

छाया पति की तरह और काया प्यार होता है।

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अपना ज़िन्दगी अपने हाथों में।

दिल से सम्हालना, दिमाग लगाके खेलना, सफलता किस्मत में।

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कम जानकारी है, तो कोई दिक्कत नहीं।

ज्यादा जान गए तो, जरूर फॅसोगे दिक्कत में यही।

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जितना पढ़ो, सोचो उतना।

नहीं तो इंसान बनेगा रोबोट, दबी हुई भावना।

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सब का अधिकार में मुझे बिश्वास है।

लेकिन अनाधिकार चर्चे का अधिकार में मुझे नफरत है।

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मर्यादा एक ऐसा चीज है, जो खोते है, वो शेर की तरह शिकारी बनते है।

जिसे मर्यादा मिलते है, वो असामाजिक निति को छोड़ कर सामाजिक बनते है।

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जहा मर्यादा नहीं है, उहा मत रहो यार।

मर्यादा पानी की तरह, मरू में कौन बिठाते है घर!

Title: Hindi Two shayari || awesome 2 lines shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Kudrat || Punjabi poetry

ਮੈਂ ਦੇਖ ਰਿਹਾ ਸੀ ਇਹ ਕੁਦਰਤੀ ਬਨਾਵਟਾ ਨੂੰ ,
ਜਿਵੇਂ ਰੁੱਖ-ਪੱਤੇ ਕੁਝ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਨੇ ।
ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਵੇਖ ਇੰਝ ਜਾਪੇ ,
ਜਿਵੇਂ ਕਣ-ਕਣ ਉਹਦੇ ਨਾਲ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਨੇ ।
ਅੰਬਰਾਂ ਤੇ ਜੋ ਚਾਦਰ ਵਿਛੀ ਹਨੇਰੇ ਦੀ ,
ਤਾਰੇ ਜਗ-ਮਗਾਉੰਦੇ ਨੇ 
ਇੰਝ ਜਾਪੇ , ਜਿਵੇਂ ਚੰਨ ਨਾਲ ਗੱਲਾਂ ਕਰ ਮੁਸਕਰਾਉਂਦੇ ਨੇ ।
ਬਹੁਤੀ ਵੱਡੀ ਦੁਨੀਆ ਨੀ ,
ਬਸ ਇੱਕ ਛਾਪ ਹੈ ਘੇਰੇ ਦੀ ।
ਅਸਮਾਨ ਵਿੱਚ ਪੰਛੀ ਉੱਡਦੇ ਦੇਖ ,
ਇੰਝ ਲੱਗੇ ਜਿਵੇਂ ਕੋਈ ਅਪਣਾ ਆ ਮਿਲਿਆ ।
ਧਰਤੀ ਤੇ ਫੁੱਲਾਂ ਨੂੰ ਦੇਖ ,
ਭੋਰਾ ਵੀ ਜਾ ਖਿਲਿਆ ।
ਮੈਂ ਵੀ ਮੁੜ-ਮੁੜ ਓਥੇ ਆ ਮਿਲਿਆ ,
ਆਪਣੇ ਹੀ ਪਰਛਾਵੇਂ ਨੂੰ । 
ਦੱਸ ਕਿੱਥੇ ਭੱਜਿਆ ਜਾਵੇਂ 
ਛੱਡ ਜਿਮੇਂਵਾਰੀਆ ਨੂੰ ।

Title: Kudrat || Punjabi poetry


OH RUSEYAA JINNI VARI | Love Shayari

Love punjabi shayari: Oh ruseyaa jinni vari har vaar maneya me palkan ute bitha k dildar baneya me

Oh ruseyaa jinni vari har vaar maneya me
palkan ute bitha k dildar baneya me