
Phoolon ka gucha jo yun raase mein akela chhoota hai,
Lagta hau aaj fir kisi heer ne raanjhe ko dhokhha diya hai,
Lagta hai aaj fir kisi sahiba ne apne mirze ko loota hai…

हाथ थाम कर भी तेरा सहारा न मिला
में वो लहर हूँ जिसे किनारा न मिला
मिल गया मुझे जो कुछ भी चाहा मैंने
मिला नहीं तो सिर्फ साथ तुम्हारा न मिला
वैसे तो सितारों से भरा हुआ है आसमान मिला
मगर जो हम ढूंढ़ रहे थे वो सितारा न मिला
कुछ इस तरह से बदली पहर ज़िन्दगी की हमारी
फिर जिसको भी पुकारा वो दुबारा न मिला
एहसास तो हुआ उसे मगर देर बहुत हो गयी
उसने जब ढूँढा तो निशान भी हमारा न मिला
तरुण चौधरी
Eh waqt hnere da ek din muk h jana ae ,
Zindagi mohtaz ae do din di,
Eh sb khed hai krma di
Na nabz bhrosa ve ek din ruk h jana ae