
But guess what? The Earth is round. You never looked back. For you, that end of line never came.
And all I could do was waiting. Waiting for you to look back.

तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।
दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।
सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।
तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।
अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।
मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।
हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।
तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।
Ik tarfi hi sahi mohobbat zari rahegi
Harenge nahi hum bazi hmari rahegi
Ladenge bidhenge girenge fir sikh bhi jayenge
Tujhse to haar kar bhi hum hi jeet jayenge ❤️
इक तर्फी ही सही मोहोब्बत जारी रहेगी
हारेगें नही हम बाजी हमारी रहेगी
लड़ेगे बिडेगे गिरेंगे फिर सीख भी जाएंगे
तुझसे तो हार कर भी हम ही जीत जाएंगे ❤️