हाल न पूछो हमारा..
बस मेरे लिखे खत को महसूस करो
दर्द भी तड़पती है कागज़ पर
मुझे कोई इस आग से महफूज करो
Enjoy Every Movement of life!
हाल न पूछो हमारा..
बस मेरे लिखे खत को महसूस करो
दर्द भी तड़पती है कागज़ पर
मुझे कोई इस आग से महफूज करो
उनके बारे में सोचूं, तो सोच में सुबह से शाम करदूँ..
मेरी दोस्ती कुबूल है उन्हें, क्या ये ज़िक्र शरेआम करदूँ..
अभी कहदूँ या रुकुं थोडा, जो मेरे दिल में बातें हैं..?
मेरा बस चले तो अपनी मुस्कान का कुछ हिस्सा, मैं उनके नाम करदूँ..
