सुना हैं दिल टूटने की आवाज नही आती
पीछे छूटे हुए रिश्तो की याद नही आती
समेट के रखना पड़ता हैं नाजुक चीजो को
कच्चे धागों के टूटने की आवाज नहीं आती
सुना हैं दिल टूटने की आवाज नही आती
पीछे छूटे हुए रिश्तो की याद नही आती
समेट के रखना पड़ता हैं नाजुक चीजो को
कच्चे धागों के टूटने की आवाज नहीं आती

अब कोई भी शायरी तुझे तड़पाती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?
मौसम की हर बहारों से मांगा था !
मैंने तुझको टूटते तारों से मांगा था |
जुदा होके तू शायद ही जी पाती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?
ख़ैर अब मैं भी तुझे भूल रहा हूं !
गलतियां सारी कबूल रहा हूं |
मेरी तस्वीरें तुझे बड़ा सताती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?